50 वर्षों के बाद, एक मानवयुक्त रॉकेट चंद्रमा पर प्रस्थान की तैयारी

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
24/01/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – नासा के ऐतिहासिक चंद्र मिशन आर्टेमिस-2 की तैयारी अपने अंतिम चरण में है, मानव जाति 50 से अधिक वर्षों के बाद चंद्रमा पर लौटने के लिए तैयार है।

नासा के विशाल ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (एसएलएस) रॉकेट और ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39बी में स्थानांतरित कर दिया गया है।

नासा और दुनिया भर के खगोलविदों के अनुसार, इस ऐतिहासिक मिशन के प्रक्षेपण की अगली तारीख 6 फरवरी, 2026 निर्धारित है, जो मानव अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला माना जा रहा है।

अब इंजीनियरों की टीम रॉकेट के अंतिम परीक्षण और ईंधन भरने की प्रक्रिया की तैयारी कर रही है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘वेट ड्रेस रिहर्सल’ कहा जाता है।

यदि यह परीक्षण सफल रहा तो चार अंतरिक्ष यात्री निर्धारित समय पर चंद्रमा की कक्षा के लिए रवाना होंगे।

कमांडर रीड वाइसमैन के नेतृत्व में विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन इस मिशन में भाग ले रहे हैं।

इसमें दिलचस्प बात ये है कि अगर ये यात्रा सफल रही तो क्रिस्टीना कोच चांद की यात्रा करने वाली दुनिया की पहली महिला बन जाएंगी ।

सुरक्षित यात्रा की तैयारी के लिए सभी यात्री अब विशेष संगरोध में हैं।

आर्टेमिस-2 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर उतरना नहीं है, बल्कि इसके चारों ओर परिक्रमा करना और ओरियन अंतरिक्ष यान की सुरक्षा और जीवन समर्थन प्रणालियों का परीक्षण करना है।

10 दिन की यात्रा यह सत्यापित करेगी कि इंसान गहरे अंतरिक्ष में लंबे समय तक कैसे काम कर सकता है।

इस मिशन की सफलता 2027 में लॉन्च किए जाने वाले आर्टेमिस-3 मिशन का मार्ग प्रशस्त करेगी, जो नासा की चंद्रमा की सतह पर फिर से इंसानों को उतारने की महत्वाकांक्षी योजना है।

फिलहाल दुनिया भर के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों की निगाहें इस विशाल रॉकेट की अंतिम उलटी गिनती पर टिकी हुई हैं। 

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