बोर्ड परीक्षा में भी विवाद,मिले नोट, फाड़ी गई उत्तर पुस्तिका

 

रायबरेली। डलमऊ में बोर्ड परीक्षा के दौरान डलमऊ क्षेत्र के भागीरथी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब परीक्षा समाप्ति के बाद उत्तरपुस्तिकाएं जमा करते समय कुछ कॉपियों में कथित रूप से सौ और पांच सौ रुपये के नोट मिलने की बात कही गई। आरोप है कि इस आधार पर केंद्र व्यवस्थापन द्वारा बड़ी संख्या में छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं मौके पर ही फाड़ दी गईं, जिससे परीक्षा देकर बाहर निकले छात्र-छात्राओं में भारी आक्रोश फैल गया।बताया जा रहा है कि दूसरे विद्यालय के छात्र इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा देने के लिए इस केंद्र पर आए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद जैसे ही कॉपियां जमा की जा रही थीं, तभी कुछ उत्तरपुस्तिकाओं में रुपये मिलने की बात सामने आई। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया।केंद्र से बाहर आए छात्रों का आरोप है कि यदि एक या दो छात्रों की कॉपी से रुपये मिले थे, तो बड़ी संख्या में छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं क्यों फाड़ी गईं….? छात्रों ने सवाल उठाया कि बिना किसी लिखित जांच, सूचना या उच्चाधिकारियों को अवगत कराए, इस तरह कॉपी नष्ट करना क्या परीक्षा नियमावली के अनुरूप है…? आक्रोशित छात्रों का कहना था कि साल भर की मेहनत के बाद बोर्ड परीक्षा उनके भविष्य की दिशा तय करती है। ऐसे में उत्तरपुस्तिका फाड़ देना सीधे-सीधे उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कई छात्र भावुक होते दिखे और उन्होंने इसे करियर बर्बाद करने की कोशिश बताया।मामला बढ़ने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। छात्रों का आरोप है कि जब वे शांतिपूर्वक अपनी बात रखने और न्याय की मांग कर रहे थे, तब कुछ पुलिसकर्मियों ने उनसे तीखी भाषा में बात की उनके ऊपर हाथ उठाने की कोशिश की तथा गाली गलौज किया पुलिस स्टेशनऔर उन्हें हटाने का प्रयास किया। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है डलमऊ कोतवाल राघवन कुमार सिंह का कहना है आरोप तो लगते रहते हैं हालांकि अभी मैं विद्यालय पॉइंट पर ही मौजूद हूं। मौके पर मौजूद दरोगा राजकिशोर अग्निहोत्री ने स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया, ताकि मामला और न बिगड़े यहां तक की चीजे स्पष्ट करने के लिए मीडिया का भी सहयोग करने की पूरी कोशिश किया गया पर विद्यालय प्रशासन मीडिया से बचत नजर आया,घटना की सूचना मिलते ही कई मीडिया प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विद्यालय प्रशासन से पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखने की बात कही और स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। विद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने न आने से संदेह और गहराता गया। यदि कार्रवाई नियमानुसार और पारदर्शी थी, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने में हिचक क्यों यह सवाल स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। वही स्टाफ सूत्रों का दावा है कि यह पूरा प्रकरण पूर्व नियोजित था भागीरथी इंटर कॉलेज में जिस विद्यालय से सेंटर आया था वह आदर्श शिक्षा निकेतन एक प्रतिष्ठित विद्यालय में गिना जाता है, जिसकी छवि धूमिल करने के लिए विद्यालय के ही कुछ लोगों ने बच्चों को पैसे रखने के लिए प्रेरित किया जिनके बातों में कुछ बच्चे आ भी गए और कॉपी में पैसे लगा दिए अंततः उन चन्द कॉपी को पकड़ी गई तथा तमाम बच्चों की कॉपियां फाड़ दी गई ताकि क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालय की छवि धूमिल हो सके हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, ना ही खबर लिखे जाने तक विद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया बल्कि मीडिया से बचते ही नजर आया गया चर्चा है कि प्रतिस्पर्धी विद्यालयों के मेधावी छात्रों को लेकर केंद्र स्तर पर अनावश्यक सख्ती बरती गई। इन दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक बताई जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी उत्तरपुस्तिका में अनुचित सामग्री या धनराशि पाई जाती है, तो इसकी सूचना बोर्ड को देकर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है उत्तरपुस्तिका को संरक्षित रखा जाता है ताकि आगे की जांच संभव हो सके। ऐसे में मौके पर ही कॉपी फाड़ देना प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी छात्र ने गलती की है तो नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन सामूहिक दंड देकर निर्दोष छात्रों का भविष्य न छीना जाए। यह प्रकरण न केवल एक परीक्षा केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पारदर्शिता और संवाद की कमी किस प्रकार एक साधारण घटना को बड़े विवाद में बदल सकती है।अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस पूरे मामले की जांच किस प्रकार करते हैं और क्या उन छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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