अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता: परमाणु हथियारों पर वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी टीम लौटी

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत बिना किसी ठोस समझौते के ख़त्म हो गई है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टीम ने ईरान के साथ लगभग 21 घंटे तक “गहन और रचनात्मक” चर्चा की लेकिन अंततः किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रही।

वार्ता की विफलता का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम बताया जा रहा है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान से दृढ़ प्रतिबद्धता चाहता है।

उन्होंने कहा, “मुख्य बात यह है कि हमें आश्वस्त होना होगा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और ऐसे हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण नहीं ढूंढेगा।”

वेंस के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत करने वाली टीम को बेहद लचीला होने और किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश करने का निर्देश दिया।

हालाँकि, ईरान द्वारा अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं करने के बाद समझौता नहीं हो सका।

वेंस ने कहा, “इस समझौते की विफलता संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए बदतर है।”

*पाकिस्तान की भूमिका और अनुरोध:*

वार्ता में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने दोनों देशों से संयम बरतने और संघर्ष विराम का पालन करने को कहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बयान जारी कर कहा, ”हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए सकारात्मक मानसिकता के साथ बातचीत जारी रखेंगे।”

इस वार्ता में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी भाग ले रहे थे।

बातचीत के दौरान अमेरिकी टीम लगातार राष्ट्रपति ट्रंप के संपर्क में थी।

भले ही कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन पाकिस्तान ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच दूरियां पाटने की कोशिशें जारी रखेगा।

हालांकि दावा किया जा रहा है कि ईरान की परमाणु सुविधाएं नष्ट कर दी गई हैं, लेकिन जब तक ईरान यह गारंटी नहीं देता कि वह लंबी अवधि में हथियार नहीं बनाएगा, तब तक अमेरिका पीछे हटता नहीं दिख रहा है।

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