करीब 80 साल बाद भारत और बांग्लादेश के बीच ब्रह्मपुत्र जलमार्ग के जरिए फिर से व्यापार शुरू होने जा रहा है। डिब्रूगढ़ से, दो जहाज 1,080 टन मेथनॉल ले जाएंगे और लगभग 783 किमी की दूरी तय करेंगे

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – लगभग 80 साल और आज़ादी के बाद पहली बार, भारत और बांग्लादेश के बीच ब्रह्मपुत्र नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय जल व्यापार फिर से शुरू हो रहा है।

इस ऐतिहासिक व्यापार और जलमार्ग की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

कार्गो और सामग्री:

असम के नामरूप में असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (एपीएल) संयंत्र में उत्पादित कुल 1,080 टन मेथनॉल को दो जहाजों के माध्यम से भेजा जा रहा है।

प्रत्येक जहाज में 27 कंटेनर (आईएसओ टैंक) हैं और प्रत्येक कंटेनर में लगभग 20 टन मेथनॉल है।

मार्ग और दूरी:

यह यात्रा असम के डिब्रूगढ़ में बोगीबील अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनल से शुरू होकर बांग्लादेश सीमा (ढाका) तक लगभग 783 किमी का जलमार्ग तय करेगी।

यात्रा समय:

बोगीबील से बांग्लादेश सीमा तक यह नदी यात्रा लगभग 7 दिनों में पूरी होने का अनुमान है।

ऐतिहासिक महत्व:

डिब्रूगढ़ नदी ब्रिटिश काल के दौरान व्यापार का एक प्रमुख केंद्र हुआ करती थी, लेकिन आजादी के बाद इस मार्ग से अंतरराष्ट्रीय माल की आवाजाही बंद कर दी गई थी, जिसे अब पुनर्जीवित किया गया है।

इससे पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक और कृषि उत्पादों (जैसे चाय, कोयला और स्थानीय उत्पाद) के लिए नए निर्यात रास्ते खुलेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *