संवेदना शून्य दिखा प्रशासन तो मानवता की रक्षा हेतु खुद के खर्चे से युवक ने जलवाए अलावकागज में सर्वत्र जल रहा अलाव सतह पर फिसड्डीसामाजिक सेवा


एनएच 730 स्थित शिकारपुर के भिसवा तिराहे पर युवक द्वारा खुद के खर्चे से जलवाया गया अलाव
कड़ाके की ठंड एवं सर्द बर्फीली पश्चिमी हवाओं के इस प्रतिकूल मौसम में आम जन मानस विशेषकर राहगीरों को ठंड से राहत प्रदान कराने हेतु राज्य सरकार द्वारा सभी प्रमुख स्थानों व चौराहों पर अलाव जलाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला व तहसील प्रशासन कागज में भले सर्वत्र अलाव जलवाने का ढिंढोरा पिट रहा हो। हकीकत इससे इतर ही तस्बीरें बयां कर रही हैं। इसकी व्यवस्था करने में प्रशासन फिसड्डी साबित हो रहा है। प्रशासन की जब इस दिशा में संवेदना शून्य हो गई तो कोदइला निवासी समाजसेवी युवक श्याम सुंदर गोंड ने भिसवा तिराहे पर जलाया मानवता का अलाव ।कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच जहां अधिकतर जनप्रतिनिधि केवल दिखावटी सेवा तक ही सीमित नजर आ रहे हैं, वहीं सदर ब्लॉक अंतर्गत भिसवा तिराहा, शिकारपुर पर इस युवक ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए यात्रियों और राहगीरों की राहत के लिए अलाव की व्यवस्था कराई। ठंड से ठिठुरते लोगों के लिए यह अलाव किसी संजीवनी से कम नहीं रहा, जिससे देर रात तक आने-जाने वाले यात्रियों को काफी राहत मिली।
अलाव व्यवस्था के दौरान श्याम सुंदर गोंड ने तीखे शब्दों में कहा कि आजकल कई नेता दूसरों के लगाए गए अलाव के सामने फोटो खिंचवाकर समाजसेवा का श्रेय लेने और राजनीतिक लाभ भुनाने में लगे रहते हैं, जबकि वास्तविक सेवा वही है जो जरूरत के समय बिना प्रचार-प्रसार के की जाए। उन्होंने कहा कि समाजसेवा का अर्थ केवल नाम और फोटो नहीं, बल्कि पीड़ित और जरूरतमंद तक वास्तविक राहत पहुंचाना है।
उन्होंने आगे कहा कि यात्रियों को ठंड से बचाते हुए अलाव के पास खड़ा देखकर उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है और वे जीवन भर ऐसे नेक कार्य करते रहने का संकल्प लेते हैं। श्याम सुंदर गोंड ने लोगों के आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब सेवा दिखावे से नहीं, संवेदना से की जाएगी।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य आज के समय में प्रेरणास्रोत हैं और दूसरों को भी आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं।

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