जलवायु संकट किसानों की फसलें बर्बाद कर रहा है, आपूर्ति बाधित होने से उर्वरक-ईंधन रुक रहा है: पीएम शाह

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल ~प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह ने कहा है कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे जलवायु परिवर्तन और युद्धों के कारण नेपाल जैसे विकासशील और गरीब देश गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं और वैश्विक आपूर्ति प्रणाली में व्यवधान नेपाली नागरिकों, विशेषकर किसानों को प्रभावित कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाएं सड़कों, पुलों, स्कूलों, घरों, कृषि भूमि और लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रही हैं।

उन्होंने कहा कि जोखिम है कि इस तरह की क्षति विकास की वर्षों की उपलब्धियों को पीछे धकेल देगी।

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अधिक गंभीर होने का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने, फसलों को नुकसान और अघोषित बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए जलवायु संकट न केवल एक पर्यावरणीय या मानवीय समस्या है बल्कि इसका सीधा संबंध विकास से है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर युद्ध के प्रभाव के कारण नेपाल के गरीबों और कृषक समुदायों को भी नुकसान हुआ है।

शाह ने कहा कि कृषि उत्पादन से लेकर बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए खाद, बीज, ईंधन और आवश्यक सामग्री की अनुपलब्धता के कारण आम नागरिकों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन देशों ने अतीत में जलवायु परिवर्तन में अधिक योगदान दिया है और जिनके पास इससे निपटने की क्षमता है, उन्हें अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जहां अमीर देश युद्ध और सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वहीं गरीब देश जो जलवायु और विकास समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें कमजोर नहीं होना चाहिए।

यह उल्लेख करते हुए कि नेपाल जैसे देशों को उस संकट का नुकसान उठाना पड़ा है जो उन्होंने पैदा नहीं किया था, शाह ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जलवायु न्याय और समान जिम्मेदारी के सिद्धांतों के अनुसार सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जब दुनिया के पास सीमा पार हथियार और सैन्य सामग्री पहुंचाने की क्षमता है तो किसानों को जरूरत के समय खाद और ईंधन तक नहीं मिलता।

उन्होंने आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय एवं निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया।

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