दलाई लामा के ग्रैमी अवॉर्ड पर चीन ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- ‘यह राजनीतिक कदम’

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
02/02/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – चीन ने सोमवार को बौद्ध भिक्षु दलाई लामा को दिए गए पहले ग्रैमी अवॉर्ड की कड़ी आलोचना की।

बीजिंग ने संगीत सम्मान को “चीन विरोधी राजनीतिक पैंतरेबाज़ी” कहा।

पिछले रविवार को आयोजित 2026 ग्रैमी अवार्ड्स में, 90 वर्षीय दलाई लामा को उनकी पुस्तक “मेडिटेशन” के ऑडियो संस्करण के लिए सम्मानित किया गया।

भारत में निर्वासन में रह रहे लामा ने विनम्रतापूर्वक इस जीत को “दुनिया भर के लोगों की साझा जिम्मेदारी की मान्यता” के रूप में स्वीकार किया।

हालाँकि, चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया।

प्रवक्ता लिन जियान ने दलाई लामा को न केवल एक धार्मिक नेता बल्कि एक “राजनीतिक विद्रोही” बताया जो धर्म की आड़ में चीन को विभाजित करना चाहता है।

चीन ने किसी भी संगठन या पुरस्कार को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के साधन के रूप में उपयोग करने के खिलाफ भी चेतावनी दी है।

तिब्बत का लाफ्दा और उत्तराधिकारी यह विवाद केवल एक पुरस्कार देने तक ही सीमित नहीं है।

दलाई लामा 1959 से तिब्बत छोड़कर भारत में रह रहे हैं। जहां चीन तिब्बत को अपने क्षेत्र का अभिन्न अंग मानता है, वहीं कई तिब्बती अपनी अलग पहचान और स्वतंत्रता चाहते हैं।

सबसे दिलचस्प और गंभीर बात यह है कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी (अगला दलाई लामा) कौन होगा।

चीन का कहना है- ”अगला दलाई लामा चीन में पैदा होगा और उसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी चुनेगी.”।

लेकिन दलाई लामा कहते हैं- ”मेरा उत्तराधिकारी एक आज़ाद देश में पैदा होगा और इसमें चीन की कोई भूमिका नहीं होगी।

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