पहले रोज़े की इफ्तार की 40 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम

सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का भी संदेश देता रोजा

अवधेश पाण्डेय जिला संवाददाता गोरखपुर

गोरखपुर। माहे रमजान की आमद के साथ ही शहर में आध्यात्मिक माहौल गहराने लगा है। इसी क्रम में पार्षद समद गुफरान ने अपने पुरखों की परंपरा को निभाते हुए पहले दिन पहले रोज़े की इफ्तार का आयोजन किया। यह सिलसिला करीब 40 वर्षों से निरंतर चला आ रहा है।
समद गुफरान के पिता स्वर्गीय गुफरान अहमद सिद्दीकी ने अपने जीवनकाल में पहले रोज़े पर इफ्तार कराने की परंपरा शुरू की थी। उनका उद्देश्य था कि लोगों को रमजान के पाक महीने की शुरुआत का एहसास हो और रोज़ेदारों का एहतिराम किया जाए। प्रारंभ में उन्होंने अपने आवास पर सीमित संख्या में लोगों को इफ्तार कराया, लेकिन समय के साथ इसमें शामिल होने वालों की संख्या बढ़ती गई। बाद में आयोजन घर के बाहर मैदान में होने लगा।
स्वर्गीय गुफरान अहमद सिद्दीकी के इंतकाल के बाद उनके पुत्र कमर गुफरान और समद गुफरान ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। हर वर्ष रमजान के पहले दिन बड़ी संख्या में रोज़ेदारों को इफ्तार कराया जाता है, जिसमें मोहल्ले और आसपास के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
इस वर्ष भी आयोजित इफ्तार में कमर गुफरान, सैयद शहाब, शकील खान (टीटीई), रवि, तबरेज, सरवर, नेहाल समेत क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रमजान के पहले दिन आयोजित यह इफ्तार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का भी संदेश देता है।

4
3
1
5
6
7
2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *