गोरखपुर में विकास की रफ्तार के साथ बढ़ते हादसे — फोरलेन-टू लेन पर दौड़ती रफ्तार बनी चिंता

गोरखपुर शहर में पिछले कुछ वर्षों में सड़कों का तेजी से विकास हुआ है। फोरलेन और टू लेन मार्गों के निर्माण से यातायात सुगम हुआ, लेकिन इसी तेज रफ्तार ने अब सड़क हादसों की संख्या भी बढ़ा दी है। चमचमाती सड़कों पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं, पर सुरक्षा इंतजाम उतने मजबूत नजर नहीं आ रहे।

तेज गति, कम नियंत्रण

गोरखपुर के मुख्य मार्गों और बाहरी फोरलेन सड़कों पर वाहनों की स्पीड नियंत्रित नहीं हो पा रही। कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतों की कमी देखी जा रही है। रात के समय अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रही है।

दुर्घटनाओं का बढ़ता ग्राफ

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद से दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। खासकर युवा वर्ग तेज रफ्तार में वाहन चलाते दिखाई देता है। हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों की अनदेखी भी हादसों का बड़ा कारण बन रही है।

विभागीय लापरवाही पर सवाल

जनमानस का आरोप है कि संबंधित विभाग और यातायात पुलिस की ओर से नियमित अभियान नहीं चलाए जा रहे। संवेदनशील स्थानों पर न तो पर्याप्त निगरानी है और न ही ठोस रोकथाम उपाय।

लोगों की प्रमुख मांगें

दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएं
स्पीड कंट्रोल के लिए कैमरे और स्पीड गन लगाए जाएं
जागरूकता अभियान चलाया जाए
सड़क किनारे अवैध कट और अतिक्रमण हटाया जाए।
विकास की असली पहचान सुरक्षित सफर से होती है। अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो चमचमाती सड़कें भी लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं।
इस संबंध मे ज़ब एसपी ट्रैफ़िक गोरखपुर से सम्पर्क किया गया तो उनका सीयुजी नंबर लगातार बंद आ रहा था।

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