मादुरो की गिरफ्तारी के बाद संयुक्त राष्ट्र ने आपात बैठक बुलाई, चीन और रूस ने मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
04/01/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिका द्वारा गिरफ्तारी के बाद अब पूरी दुनिया दो हिस्सों में बंट गई है।

इस घटना ने विश्व राजनीति में इतना बड़ा भूचाल ला दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को आपात बैठक बुलाई है।

रूस और चीन के समर्थन से कोलंबिया ने इस आपातकालीन बैठक की मांग की।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है।

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना एक ‘खतरनाक मिसाल’ कायम करेगा और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

चीन ने एक बयान जारी कर अमेरिका को मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने और दूसरे देश की सरकार को गिराने की कोशिश बंद करने की चेतावनी दी। वहीं, ईरान ने इस घटना को राजकीय आतंक करार दिया।

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि यह वेनेजुएला के आत्मसम्मान पर आघात है।

पड़ोसी देशों के अलग-अलग विचार:

वेनेज़ुएला के पड़ोसी देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में हजारों लोग जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतरे।

उन्होंने वेनेजुएला का झंडा लहराया और कहा कि यह “स्वतंत्रता का क्षण” है।

हालाँकि, सभी लैटिन अमेरिकी देश खुश नहीं हैं। ब्राजील, मैक्सिको, क्यूबा और उरुग्वे जैसे देशों ने अमेरिकी आक्रमण का विरोध किया है और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है।

उधर, अर्जेंटीना और इक्वाडोर जैसे देशों ने मादुरो की गिरफ्तारी पर खुशी जताई और कहा कि यह न्याय है।

अब अमेरिका में मादुरो एक अपराधी के रूप में जेल में हैं, जबकि चीन और रूस का तर्क है कि एक स्वतंत्र देश के राष्ट्रपति के रूप में उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

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