एक चीनी विशेषज्ञ का दावा है कि भारत की स्थायी सदस्यता चीन के साथ उसके संबंधों पर निर्भर करती है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
07/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी पर चीन की ओर से कड़ी चेतावनी दी गई है।

चीनी विशेषज्ञ गाओ ने समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि भारत की महत्वाकांक्षी योजना चीनी संबंधों से जुड़ी है।

गाओ ने कूटनीतिक शब्दों में चेतावनी दी कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने की भारत की राह आसान नहीं है।

उन्होंने कहा, ”अगर भारत चीन के साथ मित्रवत व्यवहार नहीं करेगा तो भारत कभी भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं बन सकता।”

उनके कथन के मुख्य अर्थ के अनुसार, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में चीन को ‘वीटो’ का उपयोग करने का अधिकार है।

गाओ के अनुसार, चीन अपने राष्ट्रीय हितों और संबंधों को प्राथमिकता देगा और किसी भी देश की सदस्यता प्रक्रिया को रोक देगा जिसे वह प्रतिद्वंद्वी मानता है।

उन्होंने कहा कि भारत की स्थायी सदस्यता का भविष्य भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों के सुधार पर निर्भर करता है।

सुरक्षा परिषद में भारत के प्रवेश को रोकने के चीन के रुख ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दो एशियाई शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव को और उजागर कर दिया है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की वकालत कर रहा है।

हालाँकि भारत के दावे को कई विश्व शक्तियों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन चीन अतीत में अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न शर्तें लगाता रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गाओ का बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चीन सुरक्षा परिषद में भारत के प्रवेश को रोकने के लिए अपनी विशेष शक्ति (वीटो) का इस्तेमाल कर सकता है।

इस घटना से आने वाले दिनों में भारत की कूटनीतिक रणनीति और चीन के साथ जटिल रिश्ते और भी जटिल होने की संभावना है।

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