भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता आज से लागू हो गया है, जिससे लग्जरी कारों से लेकर व्हिस्की तक सब कुछ सस्ता हो जाएगा

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
15/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आज से लागू हो गया है।

समझौते के लागू होने से भारत का 99 प्रतिशत सामान ब्रिटिश बाजार में शून्य शुल्क पर निर्यात किया जाएगा, जबकि अधिकांश ब्रिटिश सामान 3 प्रतिशत की औसत शुल्क दर पर भारत में आयात किया जाएगा।

समझौते के लागू होने से भारत में स्कॉच व्हिस्की, जिन, जगुआर लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी लक्जरी कारों, ब्रांडेड कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन और कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होने की उम्मीद है।

स्कॉच व्हिस्की पर सीमा शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है और अगले 10 वर्षों के भीतर इसे घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना है।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।

भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने 24 जुलाई, 2025 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधान मंत्री कीर स्टार्मर की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने सोशल नेटवर्क एक्स पर लिखते हुए कहा कि यह “आधुनिक यूके-भारत साझेदारी का एक ऐतिहासिक क्षण” है।

भारतीय उद्योग को बड़ा लाभ

समझौते से भारतीय कपड़े, घरेलू वस्त्र, रत्न और आभूषण, चमड़े के उत्पाद, इंजीनियरिंग सामग्री, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों को काफी फायदा होने की उम्मीद है।

ब्रिटेन ने भारतीय कपड़ों और घरेलू वस्त्रों पर 8 से 12 प्रतिशत सीमा शुल्क हटा दिया है।

कहा जा रहा है कि इससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और वियतनाम की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जायेंगे।

चूंकि ब्रिटेन में भारतीय जेनेरिक दवाओं की पंजीकरण प्रक्रिया आसान हो जाएगी, इसलिए उम्मीद है कि दवा निर्यात भी बढ़ेगा। बासमती चावल, चाय और मसाला निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

रोजगार और निवेश बढ़ाने का दावा

भारत सरकार का दावा है कि इस समझौते से कपड़ा और चमड़ा उद्योग में बड़ी संख्या में नौकरियाँ पैदा होंगी। करीब 6 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को नए बाजार और अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।

ब्रिटिश कंपनियों ने सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, हरित ऊर्जा, सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहन बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने का संकेत दिया है।

पश्चिम के लिए भारत की रणनीति

भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) समूह के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है।

फिलहाल यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ भी इसी तरह के समझौते पर बातचीत चल रही है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, भारत अब आसियान देशों, जापान और कोरिया के बजाय पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार विस्तार को प्राथमिकता दे रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यूके के साथ समझौते से यूरोपीय बाजार में भारतीय निर्यात का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

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