कश्मीर नहीं! ये है पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता, अमेरिकी विश्लेषक ने तोड़ी चुप्पी!

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के बीच एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा तेज हो गई है।

अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक क्रिस्टीना फेयर का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत के साथ पाकिस्तान की दुश्मनी कश्मीर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सबसे बड़ी चिंता दक्षिण एशिया में भारत का बढ़ता प्रभाव है।

‘कश्मीर विवाद खत्म हो जाएगा, फिर भी पाकिस्तान नहीं बदलेगा’

क्रिस्टीना फेयर के मुताबिक, अगर कल कश्मीर विवाद पूरी तरह सुलझ भी जाए तो भी पाकिस्तान भारत का विरोध करना बंद नहीं करेगा।

उनका कहना है कि पाकिस्तान की रणनीतिक सोच का केंद्र भारत की बढ़ती ताकत को चुनौती देना है, न कि सिर्फ कश्मीर मुद्दा।

फेयर का दावा है कि पाकिस्तान की सुरक्षा और सैन्य सोच लंबे समय से भारत को क्षेत्रीय महाशक्ति बनने से रोकने पर केंद्रित रही है।

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1971 की हार का भी जिक्र किया गया

क्रिस्टीना फेयर ने अपने विश्लेषण में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी जिक्र किया है।

उन्होंने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान के अलग होकर बांग्लादेश बनने के बावजूद पाकिस्तान की सैन्य रणनीति खुद को हारा हुआ नहीं मानती और आज भी वह दावा करता है कि वह दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने की क्षमता रखता है।

उनके मुताबिक कश्मीर दोनों देशों के बीच विवाद का सिर्फ एक हिस्सा है, जबकि असली प्रतिस्पर्धा भारत की बढ़ती आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक ताकत से जुड़ी है।

कारगिल विजय दिवस पर भारत-पाक रिश्ते फिर चर्चा में

रविवार को देश ने 27वां कारगिल विजय दिवस मनाया।
यह दिन 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की वीरता और बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है।

यह भारत-पाकिस्तान संबंधों में बार-बार आने वाले तनाव, सीमा पार आतंकवाद और शांति प्रयासों की विफलता की भी याद दिलाता है।

ऑपरेशन सिन्दूर का भी जिक्र

रिपोर्ट में ऑपरेशन सिन्दूर का भी जिक्र है, जिसे भारत ने पिछले साल लॉन्च किया था। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7-8 मई की रात को लॉन्च किया गया था।

भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई की थी।

भारतीय सेना ने नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इनमें मुख्य रूप से द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े ठिकाने बताए गए थे।

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