भारत गोरखा रेजिमेंट में भर्ती खोलने की मांग को लेकर पोखरा में प्रदर्शन

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
12/08/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय गोरखा सैनिकों (गोरखा रेजिमेंट भारत) में नेपालियों की दोबारा भर्ती की मांग को लेकर पोखरा में प्रदर्शन हुए हैं।

भारतीय पूर्व सैनिक गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा ने बुधवार को पोखरा में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में दोबारा भर्ती करने और पूर्व सैनिक संगठनों का नवीनीकरण फिर से शुरू करने की मांग की गई है।

पोखरा के विभिन्न स्थानों पर भर्ती होने के इच्छुक पूर्व भारतीय सैनिकों और युवाओं के साथ प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन कार्यालय कास्की पहुंचे।

प्रदर्शन के बाद मुख्य जिला अधिकारी कुमारसिंह गुरुंग के माध्यम से सरकार को दो सूत्री ज्ञापन सौंपा गया।

ब्रिगेड अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में प्रधान मंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) और गृह मंत्री सुधन गुरुंग को संबोधित किया गया है।

1814-1816 के नेपाल-ब्रिटिश युद्ध और सुगौली संधि के बाद तत्कालीन ब्रिटिश भारतीय सरकार ने गोरखा सैनिकों की भर्ती शुरू की।

यह भारत की आज़ादी के बाद भी जारी रहा। इस प्रकार गोरखा सैनिकों की भर्ती हुए 211 वर्ष हो गये।

14 जून 2022 से भारत सरकार द्वारा लागू की गई ‘अग्निपथ’ योजना के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों से भर्ती रोक दी।

कर्नल कृष्ण बहादुर के मुताबिक, अग्निपथ नीति के तहत प्रावधान है कि साढ़े 17 से 21 साल के युवाओं (अग्निवीर) को नामांकित किया जाएगा और 25 फीसदी को 4 साल की सेवा के बाद स्थायी कर दिया जाएगा।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शेष 75 प्रतिशत को 18 लाख 71 हजार की एकमुश्त राशि के साथ हटा दिया जाएगा और अन्य अर्धसैनिक बलों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि एक युवा 4 साल की अवधि में 45 से 50 मिलियन कमा सकता है और जब यह अवसर बंद हो जाता है, तो लाखों युवा रोजगार से वंचित हो जाते हैं और खाड़ी देशों की 50 डिग्री गर्मी में कम वेतन पर काम करने को मजबूर होते हैं।

भूपु सैनिकों का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई तो उनके पूर्वजों द्वारा अर्जित वीरता का इतिहास मिट जाएगा और भूपु सैनिकों के नाम पर आने वाली अरबों रुपये की धनराशि और कल्याणकारी योजनाएं खत्म हो जाएंगी।

अग्निवीर योजना का 5 साल का ट्रायल जून 2027 में खत्म हो जाएगा, ऐसे में पूर्व गोरखा सैनिकों ने तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग की है।

16 अप्रैल, 2024 को गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुसार, देश भर के जिला प्रशासन कार्यालयों को ऐसे संस्थानों को नवीनीकृत नहीं करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि ‘सैनिक’ शब्द केवल नेपाली सेना को संदर्भित करता है और अन्य संगठनों द्वारा इस शब्द का उपयोग सेना की छवि को प्रभावित करेगा।

ज्ञापन में कहा गया है कि उस निर्देश के बाद दो वर्षों तक संस्था का नवीनीकरण नहीं होने से नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय, ब्रिटिश एवं सिंगापुरी भूपू सैनिक अपमानित एवं निराश्रित महसूस कर रहे हैं।

चेयरमैन खत्री ने कहा कि 211 साल से प्रचलित ‘भूपु सैनिक’ शब्द पर आपत्ति करना उचित नहीं है।

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