नेपाल-भारत सीमा प्रबंधन कार्य समूह की बैठक: सीमा विवाद पर क्या होगा फैसला?

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
20/08/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – नेपाल-भारत सीमा प्रबंधन संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक भारत के देहरादून में जारी है।

गुरुवार को शुरू हुई वर्किंग ग्रुप की बैठक शुक्रवार तक चलेगी।

बैठक का नेतृत्व नेपाल की ओर से गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद काफले और भारत की ओर से गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पौसुमी बसु ने किया।

नेपाल से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव गेहेन्द्र राजभंडारी, आव्रजन विभाग के महानिदेशक रामचन्द्र तिवारी, सुरक्षा अधिकारी विनोद घिमिरे, कृष्णा खनाल व अन्य भाग ले रहे हैं।

दोनों देशों के संयुक्त सचिवों की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स का काम सीमा चौकियों का निर्माण करना, उन्हें बहाल करना, उनका रखरखाव करना, सीमा चौकियों का प्रबंधन करना, सीमा चौकियों की जीपीएस मैपिंग करना, सीमा क्षेत्रों के निवासियों की भूमि का विवरण एकत्र करना और सीमा पार करने की दैनिक समस्याओं का समाधान ढूंढना है।

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह पिछले साल मई में उस वक्त विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कहा था कि ‘सिर्फ भारत ही नहीं, नेपाल ने कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है।’

कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यह मुलाकात सार्थक है क्योंकि वह ऐसे बयान के बाद बैठने जा रहे हैं।

कोविड महामारी को छोड़कर कार्य समूह की बैठक नियमित रूप से बैठती रही है।
पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली का सुझाव है कि वर्किंग ग्रुप की बैठक सिर्फ नियमितता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उनका कहना है कि सीमा क्षेत्र अधिकार जैसे मामलों पर प्रभावी फैसले लिए जाने चाहिए।

एक अन्य पूर्व विदेश मंत्री उपेन्द्र यादव का कहना है कि जब तक लिंपियाधुरा-कालापानी और सुस्ता के बीच सीमा विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक ऐसी बैठक का कोई खास मतलब नहीं होगा।

उनका कहना है, ”सीमा से जुड़े मूल विवाद को सुलझाए बिना प्रबंधन कार्य समूह की बैठक अपर्याप्त मानी जाती है।”

हालांकि नेपाल और भारत के बीच सीमा से जुड़ा ‘स्ट्रिप मैप’ तैयार हो चुका है, लेकिन लिंपियाधुरा और सुस्ता के बीच विवाद के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।

सीमा विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि दो जगहों के अलावा अन्य जगहों पर विवाद सुलझाना मुश्किल नहीं होगा।

पूर्व विदेश मंत्री जिन्होंने तीन दशक पहले सीमा सुरक्षा बैठक में नेपाल का प्रतिनिधित्व किया था।

प्रकाश चंद्र लोहानी खुली सीमाओं के प्रभावी विनियमन पर जोर देते हैं।

डॉ. लोहानी कहते हैं, ”वर्ष 1995-096 में हमने प्रभावी सीमा नियमन का मुद्दा उठाया था, ”भले ही पासपोर्ट अनिवार्य न हो, लेकिन दोनों देशों से आने-जाने पर पहचान पत्र अनिवार्य करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।”

वर्किंग ग्रुप की 13वीं बैठक पिछले साल पोखरा में हुई थी। दो दिवसीय बैठक में इस बात की भी समीक्षा की जाएगी कि पिछली बैठक के निर्णयों को क्रियान्वित किया गया है या नहीं।

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