संयुक्त राष्ट्र महासभा में ज़ेलेंस्की नेपाल पर इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट

काठमाण्डौ,नेपाल – यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस पर धोखाधड़ी और बहला-फुसलाकर नेपाल समेत 47 देशों के नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती करने और युद्ध में उनका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करते हुए ज़ेलेंस्की ने दावा किया कि नेपाल, भारत, घाना, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, ​​​​बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका सहित देशों के नागरिक रूसी सेना में शामिल हो गए हैं।

उनके अनुसार, गैर-रूसी नागरिकों को विभिन्न माध्यमों से रूस पहुँचाया गया है और युद्ध के मैदान में भेजा गया है और कुछ विदेशी नागरिक युद्ध में मारे गए हैं।

उन्होंने संबंधित देशों की सरकारों से अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने और उन्हें रूसी सेना में शामिल होने और युद्ध में शामिल होने से रोकने का आग्रह किया।

ज़ेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दूसरे देशों के नागरिकों को युद्ध में घसीटने का आरोप लगाया और संबंधित देशों से इसका हिस्सा न बनने का आग्रह किया।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस की युद्ध क्षमताओं को कमजोर करने के लिए तेल उद्योग और युद्ध वित्त को सीमित करने का आग्रह किया।

इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने रूस पर उसकी सैन्य सहायता के बदले में उन्नत सैन्य तकनीक प्राप्त करने का आरोप लगाया है।

नेपाल के नाम से जुड़े ज़ेलेंस्की के दावे में यह खुलासा नहीं किया गया है कि रूसी सेना में कितने नेपाली नागरिक शामिल हैं, उनकी भर्ती कैसे हुई या कितने लोग मारे गए।

अत: महासभा में व्यक्त किये गये दावों को तदनुसार आरोप के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।

नेपाल पहले भी रूसी सेना में शामिल हो चुके नेपाली नागरिकों को लेकर कूटनीतिक पहल करता रहा है।

विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि प्रधान मंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नेपाली प्रतिनिधिमंडल 81वीं महासभा में भाग लेगा।

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