सत्य-अहिंसा की ताकत से जिसने देश को जगाया था, शास्त्री जी की सादगी ने भारत का मान बढ़ाया था” — रवि प्रताप सिंह (मुख्य वक्ता)

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गोरखपुर जनपद के रेल विहार राप्तीनगर के सरस्वती शिशु मंदिर में गांधी व शास्त्री जयंती पर राष्ट्रीय चेतना का महाकुंभ: सत्य, अहिंसा, स्वाभिमान और नागरिक कर्तव्यबोध के संकल्प के साथ संपन्न

गोरखपुर, 2 अक्टूबर 2026: स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) रेलविहार, राप्तीनगर, गोरखपुर के प्रांगण में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री जी की पावन जयंती अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और गरिमामयी वातावरण में मनाई गई।

समारोह का शुभारंभ विद्यालय प्रांगण में राष्ट्रीय ध्वज के ध्वजारोहण के साथ हुआ। इसके उपरांत माँ सरस्वती, भारत माता, महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, पुष्पार्चन एवं विधिवत भारत वंदना संपन्न हुई। संगीताचार्य अभिषेक उपाध्याय ने अपनी भावपूर्ण एवं सुरीली आवाज में राष्ट्रभक्ति गीत— “अनुरागमयी वरदानमयी, भारत जननी भारत माता…” की मनमोहक प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह में राष्ट्र चेतना का संचार किया।

कार्यक्रम का अनुशासित, गरिमामयी और प्रभावी मंच संचालन विद्यालय की आचार्या बहन दीपिका मिश्रा द्वारा किया गया।

अतिथि परिचय एवं अभिनंदन

कार्यक्रम के आरंभ में विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर ने मंचासीन मुख्य अतिथि विद्यालय के कोषाध्यक्ष अजय पाण्डेय जी एवं विशिष्ट अतिथि व अभिभावक सच्चिदानंद मिश्रा का आत्मीय परिचय कराया तथा उनका स्वागत व अभिनंदन किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विद्यालय के दक्षता प्रमुख आचार्य रवि प्रताप सिंह जी ने अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरक उद्बोधन देते हुए दोनों महापुरुषों के युगांतरकारी योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने ओजस्वी शब्दों में कहा, *”गांधी जी केवल इतिहास की किताबों में पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उनके विचारों को दैनिक जीवन में उतारने की आवश्यकता है। गांधी जी ने पूरी दुनिया को दिखाया कि नैतिक बल के सामने भौतिक ताकतें कभी टिक नहीं सकतीं। बिना एक गोली चलाए और बिना एक भी बूंद खून बहाए, उन्होंने सत्य और अहिंसा के बल पर ब्रिटिश साम्राज्य जैसे विश्व के सबसे बड़े साम्राज्य को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया।”

शास्त्री जी के पावन जीवन का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और स्वाभिमान आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा पाथेय है। उन्होंने अपने भाषण के समापन पर ओजपूर्ण पंक्तियों से सभी को भावविभोर कर दिया:

“सत्य-अहिंसा की ताकत से जिसने देश को जगाया था,
शास्त्री जी की सादगी ने भारत का मान बढ़ाया था,
नमन है उन महापुरुषों को जिन्होंने हमें जीना सिखाया था।”

द्वितीय मुख्य वक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रेम सागर तिवारी जी ने देश के स्वाधीनता संग्राम के क्रमिक इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री जी के संघर्षमय जीवन, 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनके दृढ़ नेतृत्व और रहस्यमयी ताशकंद समझौते की परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया। उन्होंने उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं और आचार्यों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें शास्त्री जी के सपनों का आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी और सशक्त भारत बनाने के लिए आज के दिन संकल्पबद्ध होना होगा।

समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर जी ने अत्यंत गहन, दार्शनिक और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित उदबोधन दिया।

प्रधानाचार्य जी ने कहा, “दक्षिण अफ्रीका से बैरिस्टर बनकर लौटने के बाद गांधी जी ने भारतीय जनमानस की नब्ज को पहचाना। उन्होंने नरम दल और गरम दल के दौर में स्वाधीनता आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया।” उन्होंने स्वाधीनता प्राप्ति के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री के चयन से जुड़े ऐतिहासिक द्वंद्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रहित सदैव व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने तथा सत्य और अहिंसा को जीवन में अपनाने का जो गांधीवादी दृष्टिकोण था, वही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मूल सामाजिक समरसता का विचार है।” उन्होंने कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति को राष्ट्रीय एकात्मता का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। शास्त्री जी के योगदान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने देश को नागरिक कर्तव्यबोध सिखाया तथा सीमा पर ‘जवान’ और खेत में ‘किसान’ दोनों को राष्ट्र की रीढ़ बताया। प्रधानाचार्य जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ के साथ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ‘जय विज्ञान’ की दृष्टि को जोड़ते हुए प्रेरणादायी पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं:

“जिसने जीना सीख लिया, मरने का अधिकार उसी को,
जो काँटों के पथ पर आया, फूलों का उपहार उसी को॥”

समारोह के समापन सत्र में विद्यालय की उप-प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय जी ने विद्यार्थियों को दोनों महापुरुषों के आचरण को अपने जीवन में उतारने की सीख दी तथा मंचासीन अतिथियों, प्रबंध समिति, आचार्यों व छात्र-छात्राओं के प्रति हृदय से आभार ज्ञापित किया।

कार्यक्रम का विधिवत समापन संगीताचार अभिषेक उपाध्याय जी द्वारा प्रस्तुत सामूहिक ‘कल्याण मंत्र’ (सर्वे भवन्तु सुखिनः…) के सस्वर पाठ एवं मिष्ठान वितरण के साथ अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ

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