मैदान-ए-हश्र में मेरा हिसाब मत लेना’, अधिकारियों के तीखे सवालों से घिरे बांग्लादेशी सेना प्रमुख

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उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
07/10/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 1 अक्टूबर को बांग्लादेश सेना की त्रैमासिक बैठक (दरबार) का आयोजन किया गया।

ऐसे में सेना के अंदर बेचैनी साफ नजर आ रही है।
इस बैठक में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मां को कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ा, जैसे नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सैनिकों की लंबे समय तक तैनाती, बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति और पहले के सुरक्षा अभियानों की प्रभावशीलता।

हालांकि सेना के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ‘कुछ हद तक बेचैनी’ है, यह 1 अक्टूबर को सामने आया जब सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सैनिकों की लंबे समय तक तैनाती, बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति और पहले के सुरक्षा अभियानों की प्रभावशीलता से संबंधित कठिन सवालों का सामना करना पड़ा।

अपने ही अधिकारियों के असहज सवालों से घिरे सेना प्रमुख ने कोई जवाब देने के बजाय अचानक नजरुल गीत की यह जोशीली पंक्ति गाना शुरू कर दिया कि ‘मैदान-ए-हशर में मेरा हिसाब न लेना’।

सुत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो घंटे तक चली कार्यवाही की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि इस बैठक में अधिकारियों के बीच ऐसे सवाल उठे जिनका सैन्य नेतृत्व अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया है।

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हालाँकि यह घटना यह साबित नहीं करती है कि सेना प्रमुख के खिलाफ कोई संस्थागत विद्रोह या संगठित चुनौती है, लेकिन यह घरेलू जिम्मेदारियों और नागरिक सरकार के साथ संबंधों को लेकर आंतरिक तनाव की ओर इशारा करती है।

लेकिन सेना प्रमुख ने जो गाना गाया है उसका मोटे तौर पर मतलब है ‘हे भगवान, कयामत के दिन मेरा न्याय मत करना.’ इसलिए इस गाने का महत्व अलग-अलग तरीके से निकाला जा सकता है।

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