भारत की कृपादृष्टि है, तभी हम हैं खुशहाल’; एक छोटे से मुस्लिम देश ने बांग्लादेश को दिखाया आईना, ढाका को बड़ी चेतावनी

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उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
07/10/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बनाए रखने में भारत की अहम भूमिका है।

उन्होंने कहा कि मालदीव जैसे छोटे द्वीप देशों को अपनी सुरक्षा और विकास के लिए भारत के साथ सहयोग की जरूरत है।

बांग्लादेश में आयोजित तीन दिवसीय ‘बंगाल की खाड़ी वार्तालाप’ में भाग लेने वाले नशीद ने ‘न्यू स्ट्रैटेजिक मिडिल’ सत्र में भारत की भूमिका पर बात की।

उन्होंने कहा कि मालदीव जैसे छोटे देशों में सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने की क्षमता नहीं है।

ऐसे में दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना बेहतर विकल्प है।

नशीद ने कहा कि उन्होंने हमेशा पाया है कि भारतीय अधिकारी मालदीव की बात सुनते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और मालदीव को भी इस विकास का हिस्सा बनना चाहिए।

उनके मुताबिक इसका मकसद इलाके के लोगों की भलाई सुनिश्चित करना है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ‘इंडिया आउट’ अभियान के साथ सत्ता में आए।

हालाँकि, बाद में उनकी सरकार ने भारत के साथ कई मुद्दों पर सहयोग फिर से बढ़ाया।

इस बदलाव पर नशीद ने कहा कि सरकार में आने से पहले नेता कई बातें कर सकते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें वास्तविक परिस्थितियों के मुताबिक नीतियों में बदलाव करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मालदीव भारत के बिना आगे नहीं बढ़ सकता।

नशीद ने बांग्लादेश की भी तारीफ की।
उन्होंने कहा कि उन्हें बांग्लादेश पसंद है और वह इसे अपना घर मानते हैं।

उन्होंने मालदीव के विकास में बांग्लादेशी लोगों के योगदान का भी जिक्र किया और कहा कि वहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी काम करते हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नशीद ने दोनों देशों से अपने मतभेद सुलझाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

नशीद की यह टिप्पणी बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के बयान के एक दिन बाद आई है।

त्रिवेदी ने ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दो साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा अप्रत्याशित थी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारत लाने में भारतीय वायु सेना या सेना की कोई भूमिका नहीं थी।

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