भीसवा श्मशान भूमि विवाद में ग्रामीणों बिच लेखपाल , ग्रामीणों ने लेखपाल का किया विरोध

कई पीढ़ियों से इसी जमीन पर शवदाह होने का दावा, वर्तमान व पूर्व ग्राम प्रधान के वृक्षारोपण का हवाला देकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

महराजगंज जनपद मे भीसवा गांव में श्मशान भूमि को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया। जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रार्थना पत्र देकर श्मशान भूमि की समस्या उठाने वाले ग्रामीणों के मामले में स्थलीय जांच करने पहुंचे हल्का लेखपाल अशोक तिवारी और हल्का कानूनगो को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। जांच की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने जमीन से जुड़े पुराने साक्ष्यों और परंपराओं का हवाला देते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा।
ग्रामीणों का कहना है कि विवादित जमीन पर कई पीढ़ियों से शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि वर्तमान ग्राम प्रधान और पूर्व ग्राम प्रधान की ओर से भी इसी स्थल पर श्मशान के नाम से वृक्षारोपण कराया गया था। ग्रामीणों ने इस कार्य के लिए धनराशि निकाले जाने की बात भी उठाई और सवाल किया कि जब इस स्थान का उपयोग लंबे समय से श्मशान के रूप में होता रहा है, तो अब इस भूमि को लेकर विवाद क्यों खड़ा हो रहा है।
स्थलीय जांच कर तैयार किया
ग्रामीणों के विरोध के बीच हल्का लेखपाल अशोक तिवारी ने अपने पास मौजूद कागजातों का विवरण ग्रामीणों को बताया। इसके बाद उन्होंने विवादित स्थल का निरीक्षण किया और स्पॉट मेमो तैयार कराया। मौके पर मौजूद लोगों से मेमो पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। लेखपाल ने तैयार किए गए दस्तावेजों को जिले के उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही।
प्रशासनिक जांच पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
श्मशान भूमि को लेकर ग्रामीणों ने अपने दावों के समर्थन में पुरानी परंपरा और ग्राम पंचायत स्तर पर हुए वृक्षारोपण का हवाला देते हुए विरोध दर्ज कराया। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अधिकारियों की जांच में भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और श्मशान स्थल से जुड़ी समस्या का उचित समाधान निकलेगा।

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