मानवता के सच्चे सेवक थे डा. काउंट सीजर मैटी
गोरखपुर जनपद के महुवातर में अखिल भारतीय इलेक्ट्रो होम्योपैथ्स गण परिषद और इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मान्यता संयुक्त संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के आविष्कारक डा. काउंट सीजर मैटी जी का 217 वां जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
यह समारोह महुआतर ओमकार नगर स्थित डॉ महेंद्र कुमार मद्धेशिया के सर्वोत्तम क्लीनिक पर आयोजित हुआ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय इलेक्ट्रो होम्योपैथ्स गण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मान्यता संयुक्त संघर्ष समिति की निगरानी समिति के सदस्य डा. आर. यल. यादव जी ने महात्मा मैटी जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर समारोह की शुभारम्भ की डॉक्टर यादव ने अपने संबोधन में बताया की महात्मा डा. काउन्ट सीजर मैटी का जन्म इटली के बोलोग्ना शहर के रोचेता नामक किले में हुआ था। वह जमींदार घराने से थे वह प्रकृति प्रेमी व दयालु थे। ऑस्ट्रिया सेना द्वारा इटली पर आक्रमण से उत्पन्न तबाही से जनता को बचाव हेतु अपनी जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने रोम के शासक को दान कर दिया डा. मैटी जी इटली के बुड्रियो क्षेत्र से जनता द्वारा मेंबर ऑफ पार्लियामेंट भी चुने गए मैटी जी ने चिकित्सा जगत का काफी गहराई से अध्ययन किया और अपने परम मित्र व बोलोग्ना यूनिवर्सिटी के बॉटनी के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर पालोकोष्टा के सहयोग से सन 1865 में इलेक्ट्रो होम्योपैथी का आविष्कार किया डा महेंद्र कुमार मद्धेशिया ने कहा कि मैटी जी ने अपने आविष्कार के क्रम में विचार किया कि मनुष्य का भोजन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वनस्पति जगत से संबंधित है अतः मनुष्य का उपचार भी पेड़ पौधों से होना चाहिए अंततः पैरासेल्सस के प्रथम सिद्धांत वनस्पति जगत में विद्युत शक्ति की उपस्थिति के नियम को अपनाकर 115 पौधों से 38 औषधियां तैयार की। डॉ राजेश दुबे जी ने बताया कि मानव शरीर में रस और रक्त दो प्रमुख जैविक पदार्थ हैं इनमें से एक अथवा दोनों की अशुद्धता ही किसी भी रोग का प्रमुख कारण है इलेक्ट्रो होम्योपैथी औषधियों से उनकी और अशुद्धता को दूर कर रोगी शरीर को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जाता है डॉ राजकुमार मिश्रा ने कहा कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी एकमात्र वनस्पतियों पर आधारित एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है जो नए व पुराने सभी रोगों का पूर्णतया हानि रहित दुष्प्रभाव रहित तत्क्षण गुणकारी इलाज प्रदान करती है।
इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए संयुक्त संघर्ष समिति के सह संयोजक डा संजय कुमार जायसवाल जी ने
समस्त इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सकों को
हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए बताया कि
आज का दिन इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा जगत के लिए अत्यंत गौरव, श्रद्धा और प्रेरणा से भरा हुआ है। इलेक्ट्रो होम्योपैथी के जनक, महान वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता और मानवता के सच्चे सेवक डॉ० काउंट सीज़र मैटी जी के 217वें जन्मदिवस के शुभ अवसर पर हम सभी उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।
डॉ० काउंट सीज़र मैटी जी का जन्म इटली में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण मानव कल्याण को समर्पित कर दिया। उस युग में जब चिकित्सा पद्धतियाँ सीमित थीं, तब उन्होंने प्रकृति से प्रेरणा लेकर इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का विकास किया। यह चिकित्सा प्रणाली वनस्पतियों के सार तत्वों पर आधारित है, जो शरीर को बिना दुष्प्रभाव के संतुलन प्रदान करती है।
डॉ० मैटी जी का विश्वास था कि प्रकृति स्वयं सर्वोत्तम चिकित्सक है। उन्होंने वर्षों के शोध, प्रयोग और अनुभव के आधार पर ऐसी औषधियों का निर्माण किया जो आज भी लाखों रोगियों के लिए आशा की किरण बनी हुई हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या, विज्ञान और सेवा का अद्भुत संगम था।
आज इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति न केवल भारत, बल्कि विश्व के अनेक देशों में जन-जन के विश्वास की चिकित्सा बन चुकी है। इस महान परंपरा को आगे बढ़ा रहे समस्त इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सक वास्तव में डॉ० मैटी जी के सपनों को साकार कर रहे हैं।
इस पावन अवसर पर हम सभी इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सकों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर प्रगति की कामना करते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह चिकित्सा पद्धति और अधिक विकसित हो तथा मानवता की सेवा में सदैव अग्रणी बनी रहे। वरिष्ठ चिकित्सक व इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के सचिव डा. एच. एन. लाल जी ने कहा कि राजस्थान में इलेक्ट्रो होम्योपैथी को मान्यता मिल चुकी है और हरियाणा सहित कई अन्य राज्य भी इस पर अपना समर्थन दे रहे हैं परन्तु उत्तर प्रदेश में भी 2015 में एक कमेटी बनाई गई थी लेकिन उस कमेटी ने बिना कोई ठोस निर्णय के इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है जिसके कारण उन्होंने हाईकोर्ट प्रयागराज में एक जनहित याचिका दायर की है। ज्ञातव्य है कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी को विभिन्न हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है और समय-समय पर इसके पक्ष में फैसला भी दिया है। 2010 में भारत सरकार ने भी इसे माना है तथा इण्टर डिपार्टमेंटल कमेटी भी गठित की है।
इस अवसर पर डा आर यल यादव डा राजेश दुबे डा महेंद्र कुमार मद्धेशिया डा योगेन्द्र कुमार पाण्डेय डा राजकुमार मिश्रा डा यशवंत सोनकर डा के यल यादव डा उमेश प्रजापति डा पुरुषोत्तम राजभर डा अजय शर्मा डा अहमद रजा सिद्दीकी डा परमात्मा यादव डा चंद्रकैश डा नेबुलाल डा राकेश यादव डा भानु प्रकाश मिश्र डा पुरुषोत्तम मद्धेशिया डा एम आई सिद्दीकी डा सुरेंद्र गुप्ता डा नवीन यादव डा एस पी मौर्य डा संजय कुमार जायसवाल डा दिनेश कुमार जायसवाल डा पी के श्रीवास्तव डा एच एन लाल डा वी पी गोरखपुरी डा आर के श्रीवास्तव व डा विनोद कुमार मिश्र उपस्थित रहे। समारोह के अंत में डा अहमद रजा सिद्दीकी की दादी के देहांत की सुचना मिलने पर सभी चिकित्सकों ने 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी

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