बड़हलगंज में प्रसूता की मौत पर बवाल, अस्पताल सील

 

एफआईआर दर्ज, डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग हुई तेज

अवधेश पाण्डेय जिला संवाददाता गोरखपुर

बड़हलगंज/गोरखपुर- एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान हुई लापरवाही से प्रिया तिवारी की मौत के बाद पूरा क्षेत्र आक्रोश से उबल उठा। घटना के बाद पुलिस प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक कार्रवाई में जुट गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है।

यह घटना कैसे हुई”

प्रिया तिवारी, पत्नी शंशाक तिवारी “गोलू”, निवासी महुलिया पोयल, की दो दिन पहले बड़हलगंज स्थित सिया हॉस्पिटल में डिलीवरी कराई गई थी। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे उनकी मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी और भारी जनाक्रोश फैल गया।

पुलिस ने की कार्रवाई”

1 – परिजनों की तहरीर पर देर रात एफआईआर दर्ज
2 – शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया
3 – अस्पताल के संचालन पर स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी गई
4 – क्षेत्राधिकारी ने आश्वासन दियाः तीन दिन के भीतर डॉक्टर की गिरफ्तारी होगी

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही हुई उजागर”

जांच में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण लगभग 10 महीनों से समाप्त है और नवीनीकरण प्रक्रिया लंबित थी। इसके बावजूद अस्पताल संचालित किया जा रहा था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम व भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अस्पताल सील किया गया,क्षेत्रवासियों ने विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए तथा बिना लाइसेंस अस्पताल संचालन को स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया गया

अंतिम संस्कार से पहले परिजनों का विरोध”

परिजनों ने मांग की कि डॉक्टर की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा समझाने और कार्रवाई के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार किया गया।

अवैध अस्पतालों पर उठ रहा सवाल”

प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की हिचकिचाहट और स्पष्ट जवाब न देने से विभागीय लापरवाही पर और सवाल खड़े हो गए।

क्षेत्र के लोगों में आक्रोश,कार्रवाई पर नजर”

प्रिया तिवारी की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस तीन दिन के भीतर डॉक्टर को गिरफ्तार कर पाती है या मामला केवल आश्वासन तक सीमित रह जाएगा।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि क्षेत्र में अवैध चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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