राफेल में फिट होंगी स्वदेशी हैमर मिसाइलें ! हैमर मिसाइलों को अब भारत में ही बनाया जाएगा

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/02/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के तहत अब हैमर मिसाइलों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

हाल ही में फरवरी 2026 में आयोजित भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता के दौरान इन मिसाइलों के स्थानीय उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे।

इसके साथ ही 114 नए राफेल लड़ाकू विमान भारत में बनाने की योजना पर भी सहमति बनी है।

हैमर मिसाइलें और भारत में निर्मित
संयुक्त उद्यम:

हैमर मिसाइलों का निर्माण भारत की सरकारी स्वामित्व वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और फ्रांस की सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस (सफ्रान) के बीच 50:50 के संयुक्त उद्यम के माध्यम से किया जाएगा।

स्वदेशीकरण:

इस परियोजना के तहत मिसाइलों के उत्पादन में स्वदेशी सामग्री को धीरे-धीरे 60% तक बढ़ाना है।

प्रमुख उप-असेंबली, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल पार्ट्स भारत में बनाए जाएंगे।

विशेषताएं:

हैमर (हाईली एजाइल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज) एक स्मार्ट, सटीक-लक्षित हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है।

इसकी मारक क्षमता 60-70 किलोमीटर है और यह बंकरों और पहाड़ी इलाकों में छिपे लक्ष्यों को तबाह करने में सक्षम है।

प्लेटफ़ॉर्म:

इन मिसाइलों को न केवल राफेल में फिट किया जाएगा, बल्कि भारत के स्वदेशी एलसीए तेजस लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत करने की भी योजना है।
भारत में राफेल विमान का निर्माण
114 नए जेट विमानों का सौदा:

भारत और फ्रांस ने लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत से 114 अतिरिक्त राफेल जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मेक इन इंडिया:

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने पुष्टि की है कि इन 114 जेटों में से 90 का निर्माण भारत में किया जाएगा।

इसके लिए डसॉल्ट एविएशन भारत में ‘फाइनल असेंबली लाइन’ स्थापित करने पर विचार कर रही है।
महत्वपूर्ण मील का पत्थर:

जून 2025 में, डसॉल्ट ने भारत में राफेल के धड़ के निर्माण के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (टीएएसएल) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह पहली बार है कि राफेल का ढांचा फ्रांस के बाहर बनाया जा रहा है।

नागपुर हब:

डसॉल्ट की नागपुर स्थित इकाई पहले से ही घटकों का निर्माण कर रही है, और भविष्य में वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए एक प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद है।

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