नेपाल और भारत के सदियों पुराने रिश्ते और खुली सीमाओं की सुविधाओं का आनंद दोनों तरफ के नागरिकों को समान रूप से मिलना चाहिए

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
11/04/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – हालाँकि, वाहनों के परिचालन को लेकर मौजूदा भेदभावपूर्ण प्रावधान ने नेपालियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई है।

*क्या यह उचित है?*
अनुमति मिलने पर भारतीय वाहन नेपाल के हर कोने तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

नेपाली वाहन जटिल प्रक्रियाओं, महंगे बांड और कुछ सीमा क्षेत्रों से आगे जाने पर सख्त प्रतिबंधों के साथ भारत में प्रवेश कर रहे हैं।

एक ही संधि और पड़ोसी संबंधों के अंतर्गत एक पक्ष के लिए ‘खुला आसमान’ और दूसरे पक्ष के लिए ‘संकीर्ण घेरा’ रखना कूटनीतिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से ग़लत है।

नेपाल सरकार से हमारी मांग

*1.* यदि भारतीय वाहनों को पूरे नेपाल में चलने की अनुमति दी जाती है, तो नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए दिल्ली, मुंबई या भारत के किसी भी कोने में बिना किसी परेशानी के जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

*2.* कागजी प्रक्रिया में सरलीकरण ‘सुविधा’ नामक बोझिल अनुमति प्रणाली को डिजिटल और आसान बनाया जाना चाहिए।

*3.* कूटनीतिक पहल नेपाल सरकार को भारत सरकार के साथ ‘मोटर वाहन समझौते’ की तुरंत समीक्षा करनी चाहिए और इसे समानता के आधार पर लागू करना चाहिए।
अधिकार और सम्मान बराबर होना चाहिए।

पड़ोसियों के साथ रिश्ते न केवल भावनाओं में, बल्कि व्यवहार और कानून में भी समान होने चाहिए।

आइए, इस आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने के लिए एकजुटता दिखाएं।

मेरी राय
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में “पारस्परिकता” सबसे बड़ी शक्ति है। भले ही नेपाल ने अपने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय वाहनों को सुविधा प्रदान की है, लेकिन राज्य को पड़ोसी देश में अपने नागरिकों को होने वाली पीड़ा पर चुप नहीं रहना चाहिए।

यह न केवल परिवहन का मामला है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का भी मामला है।

सरकार को इस मुद्दे को प्रमुखता से उच्च स्तरीय कूटनीतिक पटल पर रखना चाहिए।

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