कौन थे गौरव तिवारी और क्या सच में आत्माओं के संपर्क में थे?
गोरखपुर। भारत में पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन यानी भूत-प्रेत और कथित आत्माओं से जुड़े मामलों की चर्चा जब भी होती है, तब सबसे पहले नाम आता है गौरव तिवारी का।
वे खुद को “घोस्ट हंटर” नहीं बल्कि पैरानॉर्मल रिसर्चर कहते थे। उन्होंने कई टीवी शो, कथित भूतिया जगहों और रहस्यमयी घटनाओं की जांच की थी।
साल 2016 में उनकी अचानक हुई मौत ने पूरे देश में सनसनी फैला दी। कुछ लोगों ने इसे आत्माओं का असर बताया, जबकि पुलिस जांच ने इसे आत्महत्या माना।
कौन थे गौरव तिवारी?
इंडियन परानार्मल सोसाइटी के संस्थापक और सीईओ रहे गौरव तिवारी पेशे से एक प्रशिक्षित पायलट थे, लेकिन बाद में उन्होंने पैरानॉर्मल रिसर्च को अपना करियर बना लिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने भारत और विदेशों की 6000 से अधिक कथित “हॉन्टेड” जगहों की जांच की थी। वे टीवी कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए, जिनमें कथित भूतिया घटनाओं की पड़ताल की जाती थी।
क्या सच में आत्माओं से बात करते थे?
गौरव तिवारी का दावा था कि वे “पैरानॉर्मल एनर्जी” को महसूस कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने कई इंटरव्यू में यह भी कहा था कि हर घटना भूत-प्रेत नहीं होती।
उनकी टीम वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करती थी, जैसे ईएमएफ मीटर, नाइट विजन कैमरा, ऑडियो रिकॉर्डर, तापमान सेंसर वे अक्सर कहते थे कि कई घटनाएं मानसिक दबाव, डर या वातावरण के कारण भी होती हैं।
किन जगहों पर की थी जांच?
मीडिया रिपोर्ट्स और टीवी एपिसोड्स के अनुसार गौरव तिवारी और उनकी टीम ने कई चर्चित जगहों पर कथित पैरानॉर्मल जांच की थी, जिनमें शामिल थीं:
दिल्ली और एनसीआर के कथित हॉन्टेड फ्लैट राजस्थान के पुराने किले
पश्चिम बंगाल की भूतिया हवेलियां
गोवा और मुंबई के चर्चित पैरानॉर्मल लोकेशन कॉलेज हॉस्टल और परित्यक्त इमारतें हालांकि कई मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं हैं।
कौन था “बच्चूआ”?
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर “बच्चूआ” नाम एक कथित आत्मा या केस से जोड़ा जाता है, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक या प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
संभव है कि यह किसी लोककथा, यूट्यूब कहानी या वायरल अफवाह का हिस्सा हो। गौरव तिवारी की आधिकारिक जांच रिपोर्टों में “बच्चूआ” नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।
क्या हॉस्टल की आत्मा से प्रभावित थे?
सोशल मीडिया और कई अनौपचारिक कहानियों में दावा किया गया कि किसी हॉस्टल या भूतिया जगह की जांच के बाद वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे।
लेकिन इन दावों की पुष्टि किसी सरकारी जांच या मेडिकल रिपोर्ट में नहीं हुई। ऐसी अधिकांश बातें इंटरनेट चर्चाओं और अफवाहों पर आधारित हैं।
कैसे हुई थी मौत?
साल 2016 में दिल्ली के द्वारका स्थित घर में गौरव तिवारी मृत पाए गए। शुरुआती रिपोर्ट में उनके गले पर निशान होने की बात सामने आई, जिसके बाद रहस्य और गहरा गया।
बाद में पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कहा गया कि यह आत्महत्या का मामला था और किसी बाहरी हमले के प्रमाण नहीं मिले।
हालांकि उनके परिवार और कुछ करीबी लोगों ने कहा था कि वे तनाव में थे और उन्होंने “निगेटिव एनर्जी” महसूस होने की बात कही थी।
क्या सच में आत्माओं के जकड़ में फंस गए थे?
इस सवाल का कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक प्रमाण नहीं मिला।
मामले में दो तरह की बातें सामने आईं:
- आधिकारिक जांच
पुलिस ने आत्महत्या बताया
फाउल प्ले के सबूत नहीं मिले - जनमानस और इंटरनेट थ्योरी
कुछ लोगों ने “निगेटिव एनर्जी” या आत्माओं का असर बताया
सोशल मीडिया पर कई रहस्यमयी कहानियां वायरल हुईं
लेकिन अब तक किसी भी एजेंसी ने यह नहीं कहा कि उनकी मौत किसी पैरानॉर्मल शक्ति के कारण हुई थी।
न्यूज सूत्रों के हवाले आगे गौरव तिवारी पर जानकारी अभी और इकठ्ठा की जा रही।

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