आसमान में और मजबूत होगी भारत की ताकत, वायुसेना को मिलेंगे 150 जेट

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
16/08/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू पायलट प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है।

वायुसेना ने करीब 150 नए उन्नत जेट ट्रेनर विमानों की खोज शुरू कर दी है।
इसके लिए भारतीय और विदेशी विमान निर्माताओं से जानकारी मांगी गई है।

इन विमानों का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लड़ाकू पायलटों को नवीनतम लड़ाकू विमान उड़ाने से पहले उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करना होगा।

इन नए विमानों को मौजूदा हॉक एमके-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर के भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

हॉक एमके-132/ 2008 से भारतीय वायु सेना में उन्नत प्रशिक्षण की रीढ़ रहा है और इसने बुनियादी प्रशिक्षण और आधुनिक लड़ाकू विमानों के बीच एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में काम किया है।

150 नए प्रशिक्षक क्यों जरूरी हैं?

फाइटर पायलट बनने से पहले पायलटों को अलग-अलग चरणों में ट्रेनिंग दी जाती है। एडवांस्ड जेट ट्रेनर वह चरण है जहां पायलट हाई स्पीड जेट, आधुनिक एवियोनिक्स, हथियार प्रणालियों और जटिल वायु स्थितियों से निपटना सीखते हैं।

नए ट्रेनर के आने के बाद पायलटों को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए काफी बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।

नई तकनीक पर जोर रहेगा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायुसेना के नए स्टेज-III ट्रेनर में फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल, ग्लास कॉकपिट और
आधुनिक हैंड्स-ऑन-थ्रोटल-एंड-स्टिक सिस्टम जैसी क्षमताओं की आवश्यकता है।

उम्मीद है कि नेविगेशन प्रणाली भारत के NavIC के साथ जीपीएस और ग्लोनास जैसी प्रणालियों का उपयोग करने में भी सक्षम होगी।

इसका मतलब यह है कि भविष्य के पायलटों को न केवल विमान उड़ाने का प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल और नेटवर्क-केंद्रित कॉकपिट का भी अनुभव मिलेगा।

पायलट विमान के लिए क्यों तैयार हैं?

इन नए प्रशिक्षकों से स्नातक होने वाले पायलट तेजस, राफेल, Su-30MKI और भविष्य के तेजस Mk-2 और AMCA जैसे आधुनिक लड़ाकू प्लेटफार्मों पर जाने के लिए बेहतर रूप से तैयार होंगे।

भारत में विनिर्माण की संभावना

इस प्रोजेक्ट में स्वदेशी निर्माण को भी महत्व दिया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, RFI में ‘खरीदें (भारतीय) या बेहतर’ को प्राथमिकता दी गई है और कंपनियों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।

भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पहले ही HLFT-42 जैसे उन्नत ट्रेनर का प्रस्ताव दे चुकी है।

हालाँकि, यह अभी भी प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है और अंतिम विमान का चयन आगे की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।

वायुसेना के लिए बड़ा फायदा

150 नए जेट प्रशिक्षकों के आने से पायलट प्रशिक्षण क्षमता और आधुनिक लड़ाकू विमानों के अनुरूप प्रशिक्षण में सुधार होने की उम्मीद है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायु सेना के भावी पायलट फ्रंटलाइन फाइटर पर जाने से पहले ही अधिक आधुनिक कॉकपिट और युद्ध स्थितियों का अनुभव कर सकेंगे।

यानी यह सिर्फ पुराने ट्रेनर विमानों को बदलने की योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के भावी लड़ाकू पायलटों को नई पीढ़ी के हवाई युद्ध के लिए तैयार करने की एक बड़ी पहल है।

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