भारत ने बदला गियर: 6th जनरेशन फाइटर जेट पर बडा ऐलान

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
18/02/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत अब उन्नत मध्यम लड़ाकू विमानों के डिजाइन और विकास में तेजी ला रहा है।
इसकी जानकारी खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेंगलुरु में दी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पिछले वर्षों के अधूरे प्रयासों को पूरा करने का समय आ गया है, खासकर एयरो इंजन और आधुनिक लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आम तौर पर एक इंजन को विकसित करने में 25 साल लगते हैं, लेकिन भारत की वर्तमान जरूरतों और महत्वाकांक्षाओं के अनुसार, समय सीमा केवल 5 साल है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को वह हासिल करना है जो अन्य देश दो दशकों में हासिल करते हैं।

छठी पीढ़ी की तकनीक पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि अब केवल 5वीं पीढ़ी तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है. भारत के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और उनसे जुड़े एयरो इंजनों को अत्याधुनिक तकनीक के साथ विकसित करना होगा।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों के उपयोग पर ध्यान देने की भी सलाह दी ताकि देश वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी में आगे रहे।

उन्होंने कहा कि इंग्लैंड और फ्रांस के साथ एयरो इंजन विकास समझौते से न केवल भारत को नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी बढ़ेगी।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक

राजनाथ सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी है. हाल के वर्षों में स्वदेशी हथियारों, संचार उपकरणों और निगरानी प्रणालियों ने भारतीय सेना की ताकत बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा कि इससे सेना का मनोबल और देशवासियों का गौरव दोनों बढ़ा है।

रक्षा मंत्री ने विशेषज्ञों से बदलते समय और नई चुनौतियों के अनुसार नई प्रौद्योगिकियों और उपकरणों के विकास पर अधिक ध्यान देने को कहा, ताकि भारतीय सेना के पास विश्व स्तरीय प्रणालियां हो सकें।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका

राजनाथ सिंह ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते का जिक्र किया और कहा कि यह काफी समय से लंबित था, लेकिन अब यह पूरा हो गया है. यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक ताकत को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में ग्रीस के रक्षा मंत्री ने भारत को न केवल एक उभरती हुई शक्ति के रूप में देखा, बल्कि एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में देखा। यह इस बात का संकेत है कि दुनिया अब भारत को एक सामान्य राष्ट्र से ऊपर मानती है।

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