मंदिर प्रबंधन ने सनातन धर्म को न मानने वालों के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ में प्रवेश पर रोक लगा दी है

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
12/03/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने उत्तराखंड में अपने प्रशासन के तहत 47 मंदिरों में सनातन धर्म का पालन नहीं करने वाले लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

इन मंदिरों में प्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर शामिल हैं।

समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित ये दोनों मंदिर चारधाम यात्रा का अभिन्न अंग हैं।

कहा जाता है कि ये दोनों मंदिर उत्तराखंड में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले तीर्थ स्थलों में सबसे आगे हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा धार्मिक पर्यटन पर निर्भर रहा है।

सुत्र के मुताबिक, समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देहरादून स्थित समिति के कार्यालय में आयोजित बजट बैठक के दौरान इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

बताया गया है कि यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास के मुख्य परिसर पर लागू होगा।

अध्यक्ष द्विवेदी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चारधाम मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था सनातन धर्म में बनी रहे।

हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मंदिर प्रशासन यह कैसे निर्धारित करेगा कि कोई व्यक्ति सनातन धर्म का अनुयायी है या नहीं।

द हिंदू से बात करते हुए अध्यक्ष द्विवेदी ने बताया कि समिति ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में गैर-रूढ़िवादी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। 

‘सनातनी’ शब्द की व्याख्या करते हुए द्विवेदी ने कहा, ‘जो सनातनी धर्म को मानता है वह सनातनी है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘जो व्यक्ति माथे पर तिलक लगाता है, मंत्र जाप करता है, चालीसा पढ़ता है और श्री बद्री-केदार में आस्था रखता है वह सनातनी है।’

सुत्र के अनुसार, अध्यक्ष द्विवेदी ने संकेत दिया था कि समिति पिछले जनवरी की शुरुआत में चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की संभावना तलाश सकती है।

इसी बैठक में समिति ने आगामी चारधाम यात्रा से जुड़ी तैयारियों के लिए करीब 121 करोड़ के बजट को मंजूरी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, बद्रीनाथ धाम के लिए 57.5 करोड़ भारू और केदारनाथ धाम के लिए 63.6 करोड़ भारू आवंटित किए गए हैं।

समिति ने तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष की स्थापना का भी निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा से जुड़े पुरोहितों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है।

इस कोष के माध्यम से तीर्थ पुरोहितों को वित्तीय सहायता एवं अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान किया जायेगा।

2026 की तीर्थयात्रा के लिए, केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ मंदिर के दरवाजे 23 अप्रैल को खोले जाएंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के द्वार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर खोले जाएंगे।

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