सऊदी महिलाएं बिना पुरुष के विदेश यात्रा कर सकेंगी

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
17/04/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – सऊदी अरब में महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।

लंबे समय तक यहां महिलाओं को किसी भी बड़े फैसले के लिए अपने पुरुष गार्जियन यानी पिता, पति या भाई की इजाज़त लेनी पड़ती थी।

लेकिन अब सरकार ने ऐसे नियमों में ढील देकर महिलाओं को नई आज़ादी देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में 21 साल और उससे ज़्यादा उम्र की महिलाएं अब बिना किसी पुरुष पेरेंट की इजाज़त के पासपोर्ट बनवा सकती हैं और विदेश यात्रा कर सकती हैं।

यह फैसला पुराने गार्जियनशिप सिस्टम को कमज़ोर करता है, जिसने महिलाओं की आज़ादी को काफी हद तक सीमित कर दिया था। पहले, महिलाओं को पासपोर्ट बनवाने, यात्रा करने, यहां तक ​​कि कई सरकारी नौकरियों के लिए भी पुरुषों की मंज़ूरी ज़रूरी थी।

यह बदलाव 2019 में किए गए एक कानून में बदलाव का हिस्सा है, जिसे सऊदी अरब में बड़े सामाजिक सुधारों में से एक माना जाता है।

इन सुधारों के तहत, महिलाओं को न सिर्फ़ पासपोर्ट और यात्रा की आज़ादी मिली, बल्कि उन्हें शादी, तलाक़ और बच्चों के जन्म से जुड़े डॉक्यूमेंट्स को सेल्फ़-रजिस्टर करने का अधिकार भी दिया गया।

इस फैसले के पीछे सऊदी अरब का “विज़न 2030” प्लान भी अहम माना जा रहा है, जिसका मकसद देश को मॉडर्न बनाना और महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाना है।

सरकार चाहती है कि महिलाएं पढ़ाई, नौकरी और समाज के हर फील्ड में आगे बढ़ें, ताकि देश की इकॉनमी भी मजबूत हो सके।

हालांकि इस बदलाव को काफी बड़ा और पॉजिटिव माना जा रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी पूरी बराबरी नहीं आई है।

कुछ मामलों में, पुरुष गार्जियन की भूमिका अभी भी बनी हुई है, जैसे शादी या कुछ सामाजिक फैसलों में। इसके अलावा, कई जगहों पर सामाजिक रिवाज और पुराने ख्याल अभी भी महिलाओं की आज़ादी को रोकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इन सुधारों पर सऊदी महिलाओं का रिस्पॉन्स काफी पॉजिटिव रहा है।

कई महिलाओं ने इसे अपनी ज़िंदगी में एक “नई शुरुआत” बताया और कहा कि अब उन्हें अपने फैसले खुद लेने का हक है। वहीं, कुछ क्रिटिक्स का मानना ​​है कि यह कदम इंटरनेशनल प्रेशर कम करने और देश की इमेज सुधारने के लिए उठाया गया है।

अगर मोटे तौर पर देखें, तो यह बदलाव सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि सऊदी समाज में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। जहां पहले महिलाओं को हर कदम के लिए परमिशन लेनी पड़ती थी, वहीं अब वे धीरे-धीरे इंडिपेंडेंट हो रही हैं। यह बदलाव भविष्य में और भी बड़े सामाजिक सुधारों का रास्ता बना सकता है।

अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सुधार पूरी तरह से लागू होंगे और क्या समाज इन्हें पूरी तरह से अपनाएगा। क्योंकि कानून बदलना एक बात है, लेकिन सोच बदलना उससे भी बड़ी चुनौती है।

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