साहब फरमाते हैं आराम, सिपाही काटते हैं चालान, खुद मोटर वाहन अधिनियम की उड़ा रहा है यातयात विभाग धज्जियां

रायबरेली शहर में यातायात व्यवस्था धरातल पर चली गई है और इसको संभालने वाली यातायात पुलिस केवल रंग रूटों के माध्यम से चालान करवाने में लगी हुई है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहनों का चालान काटने के लिए कुछ नियम और शर्ते हैं। जिसमें चालान केवल सब इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर या उससे ऊपर का अधिकारी ही काट सकता है लेकिन सभी अधिकारियों ने यह काम नए सफेद वर्दी धारी अधिकारियों को सौंप दिया है। जिससे कि उन्हें धूप और गर्मी का एहसास ना हो चेहरे की रंगत ना खराब हो जाए। वही जिनका काम यातायात संचालन की व्यवस्था संभालना है यही सिपाही सड़कों पर अपनी हनक दिखाने के लिए मोबाइल को लेकर चौराहों पर रंगबाजी करते हुए दिखाई देते हैं। परंतु ध्वस्त यातायात व्यवस्था सुधारने का कोई भी विकल्प नहीं दिखाई देता है। जबकि जिन अधिकारियों के जिम्मे में यह काम है उन्हें तमाम चौराहों पर आराम फरमाते हुए देखा जा सकता है या फिर किसी नेता, मंत्री, विधायक के आने पर उनके आगे पीछे भ्रमण करते हुए जनता देखती है।अब यही जनता पूछती है कि जब चालान काटने की सिपाहियों को अनुमति ही नहीं है तो कैसे बीच चौराहे पर वाहनों की फोटो खींच ली जाती है और जिन अधिकारियों को यह अनुमति मिली है वह क्यों नहीं सामने दिखाई देते हैं। नतीजा भी जनता बताती है कि सबके सामने दिखाई दे रहा है कि पूरा शहर जाम की समस्या से जूझ रहा है लेकिन इससे निपटने के लिए कोई विकल्प नहीं है न ही जाम में कभी भी ये सफेद वर्दीधारी दिखाई देते है बल्कि जनता के सामने भी नहीं आते हैं। मोबाइल सिस्टम से ई चालान होने के कारण या नहीं पता चल पाता है कि चालान किस व्यक्ति द्वारा किया गया है बल्कि उसमें सब का नाम दर्ज होकर आ जाता है कि उनके द्वारा ही चालान किया गया है जिससे कि सब की बड़े साहब के सामने इज्जत और जब बना रहता है नीचे सफेद वर्दी धारी सिपाही अपने साहबों के कोटे को पूरा करने के लिए चालान काटने के लिए मोबाइल हाथ में लेकर घूमा करते है। तो वही बात है जिसका काम उसी को साजे दूसरा करें तो जूता बाजे। इससे आप समझ ही सकते हैं कि जब अपना काम छोड़कर कोई दूसरे का काम करता है तो उसे काम का नतीजा क्या होता है कुछ ऐसा ही हाल रायबरेली में चल रहा है। लेकिन यातायात पुलिस कर्मियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। जिसका नतीजा है कि लगातार दुर्घटना में वृद्धि होती जा रही है और पुलिस केवल वाहन वाहन चालक पर मुकदमा दर्ज कर छुट्टी पा जाती है। जबकि कभी यह नहीं ध्यान दिया जाता है कि इन यातायात सिपाहियों की मनमानी के कारण भी दुर्घटनाओं को निमंत्रण मिलता है ।

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