सीमांकन न होने का उठाया फायदा, संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम से जांच की मांग

कर्नलगंज में मकान गणना में बड़ा ‘खेल’

कादीपुर के 60 मकान पालिका में जोड़े, पालिका के 20 मकान गांव में दर्ज

जय प्रकाश सिंह ने लगाए गंभीर आरोप: ‘जानबूझकर की गई हेराफेरी, दोषियों पर हो कार्रवाई’

गोण्डा। नगर पालिका परिषद कर्नलगंज के सीमा विस्तार में बड़े पैमाने पर धांधली व फर्जीवाड़ा के बाद अब मकान गणना में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ग्राम कादीपुर निवासी जय प्रकाश सिंह पुत्र चंद्रकेश सिंह ने संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया है कि सीमांकन न होने का फायदा उठाकर पालिका और ग्राम पंचायत के कर्मचारियों ने मकान गणना में जमकर हेराफेरी की है।

क्या है पूरा मामला?

जय प्रकाश सिंह के अनुसार,
सन् 2022 में जारी शासनादेश के अनुसार नगर पालिका परिषद कर्नलगंज का सीमा विस्तार किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत की कुल 208 गाटा संख्याऐं नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में शामिल की गई। परन्तु आज तक सीमांकन कर विस्तार के उपरान्त नगर पालिका परिषद कर्नलगंज व ग्राम कादीपुर की सीमा को जरिये सीमांकन कर अलग नहीं किया गया है। इसी का बेजा लाभ उठाकर नगर पालिका परिषद कर्नलगंज- गोंडा के मकान गणना करने वाले कर्मचारियों द्वारा ग्राम कादीपुर के लगभग 60 मकान नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में गिनती कर लिये गये, तथा ग्राम कादीपुर की मकान गणना करने वाले कर्मचारियों द्वारा सीमांकन ना होने के कारण नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में आने वाले लगभग 20 मकान ग्राम पंचायत कर्नलगंज ग्रामीण में गिनती कर लिया गया है। ऐसी स्थिति में मकान गणना के दौरान की गई अनियमितता/हेराफेरी की जांच करवाते हुए दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करवाकर मकान गणना को दुरूस्त किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग

जय प्रकाश सिंह ने तहसील कर्नलगंज में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थनापत्र देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मकान गणना में हुई अनियमितता को दुरुस्त कराया जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए।

नगर पालिका व गांव के सीमांकन न होने से बढ़ा विवाद

स्थानीय लोगों का कहना है कि 2022 में सीमा विस्तार के बाद भी जमीन पर सीमांकन न होने से आए दिन विवाद हो रहे हैं। न तो पालिका को पता है कि कौन सा मकान उसके क्षेत्र में है और न ही ग्राम पंचायत को। इसी का फायदा उठाकर कर्मचारियों ने मनमानी गणना कर दी। इससे भविष्य में टैक्स, योजनाओं और विकास कार्यों में दिक्कत आएगी। सीमा विस्तार कागजों पर हो गया, लेकिन जमीन पर सीमांकन नहीं हुआ। नतीजा— मकान गणना में ‘खेल’ हो गया। अब सवाल ये है कि 2022 से लटके सीमांकन के लिए जिम्मेदार कौन है और मकान गणना की गड़बड़ी कब सुधरेगी? डीएम की जांच से ही सच सामने आएगा।

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