सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में झंडा दिवस व प्रतिभा सम्मान समारोह का भब्य हुआ आयोजन

 

NEET-2026 में सफलता का परचम लहराने वाली मेधावी बहनों का हुआ भव्य नागरिक अभिनंदन “हमारा तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक, इसके संरक्षण और गौरव की रक्षा हेतु समर्पित रहे युवा शक्ति” — विनोद सिंह राठौर (प्रधानाचार्य)

गोरखपुर, जनपद के रेल विहार राप्तीनगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) गोरखपुर के प्रांगण में आज ‘भारतीय झंडा दिवस’ (National Flag Day) तथा ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’ का एक अत्यंत गरिमामयी, भव्य और प्रेरणादायी संयुक्त आयोजन प्रातःकालीन वंदना सभा में हर्षोल्लास एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण के बीच संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर जहाँ एक ओर समूचा विद्यालय परिसर तिरंगे के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रप्रेम की लहर से ओत-प्रोत नजर आया, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन करने वाली मेधावी बहनों का अभिनंदन कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ की गईं।

समारोह के प्रथम सत्र में झंडा दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता रीता राय जी ने विद्यालय की प्रातःकालीन वंदना सभा में भैया-बहनों को संबोधित किया। अपने भावपूर्ण और ओजस्वी उद्बोधन में उन्होंने कहा, “22 जुलाई 1947 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है, जब भारत की संविधान सभा ने हमारे तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अंगीकार किया था। हमारा राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों का एक वस्त्र नहीं है, बल्कि यह भारत की आन, बान, शान और 140 करोड़ देशवासियों की अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।”

उन्होंने तिरंगे चक्र और तीनों रंगों की दार्शनिक व्याख्या करते हुए आगे कहा, “हमारा राष्ट्रीय ध्वज हमें जीवन जीने का एक दिव्य संदेश देता है। इसका केसरिया रंग देश के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और अनूठे बलिदान की याद दिलाता है। सफेद रंग सत्य, पवित्रता और विश्व शांति का प्रतीक है, जो हमें हमेशा धर्म और नीति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वहीं, हरा रंग हमारी धरती की खुशहाली, समृद्धि और विश्वास को प्रदर्शित करता है। इसके मध्य में स्थित नीले रंग का ‘अशोक चक्र’ हमें निरंतर प्रगति के मार्ग पर गतिशील रहने का संदेश प्रदान करता है। हमें हर क्षण अपने तिरंगे के सम्मान की रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिए।”

झंडा दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय प्रांगण में एक अद्भुत दृश्य तब देखने को मिला जब चिकित्सा क्षेत्र की देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा ‘NEET-2026’ में सफलता का परचम लहराने वाली विद्यालय की दो मेधावी छात्राओं— बहन सृष्टि तथा बहन प्रतिभा चौधरी का भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया।

विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर जी ने दोनों सफल मेधावी बहनों का मुंह मीठा (मिष्ठान खिलाकर) कराकर उन्हें पुष्पगुच्छ प्रदान किया और पूरे विद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं। सम्मान की इसी श्रृंखला में आचार्या क्षमा त्रिपाठी जी ने बहन प्रतिभा चौधरी को तथा आचार्या दीपिका मिश्रा जी ने बहन सृष्टि को माल्यार्पण, उपहार एवं शुभाशीष देकर सम्मानित किया। इस दौरान उपस्थित समस्त आचार्यों और हजारों भैया-बहनों की करतल ध्वनि से पूरा सभागार गूंज उठा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विद्यालय के आदरणीय प्रधानाचार्य विनोद सिंह राठौर जी ने वंदना सभा को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रभावशाली, विस्तृत और ओजस्वी भाषण दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अध्यायों को टटोलते हुए विद्यार्थियों में देशभक्ति और राष्ट्रीय कर्तव्यबोध का अलख जगाया।

प्रधानाचार्य ने कहा, “आज का यह पावन दिवस हमारे राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और गौरवमयी दिवस है। मैं सरस्वती शिशु मंदिर परिवार की ओर से आप सभी भैया-बहनों, आचार्यों और अतिथियों को झंडा दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ। आज का दिन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के उस लंबे और भीषण दौर को स्मरण करने का दिन है, जब हमारे पूर्वजों ने माँ भारती के चरणों में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।”

भारतीय इतिहास के पन्नों को रेखांकित करते हुए राठौर ने कहा, “यह तिरंगा ध्वज सहज ही हमें प्राप्त नहीं हुआ है। इसके पीछे भारत माता के लाखों अमर सपूतों, क्रांतिकारियों और स्वाधीनता सेनानियों के अनगिनत कष्ट, संघर्ष और बलिदान की महान गाथा छिपी हुई है। पिंगली वैंकैया जी द्वारा परिकल्पित इस ध्वज ने भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर देश की आजादी की भोर तक करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में पारे पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया। जब-जब स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों ने हाथों में तिरंगा थामा, तब-तब अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई। यह ध्वज हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के अमर बलिदानों, अनवरत प्रयासों और देशभक्ति का अमूल्य प्रतिफल है। हमें सदैव माँ भारती के उन अमर सपूतों को नमन करना चाहिए और उनके दिखाए मार्गों पर चलना चाहिए।”

NEET परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य जी ने अत्यंत भावुक और दिशा-निर्देशात्मक लहजे में कहा, “आज का दिन हमारे लिए दोहरे आनंद का है। हमारी दो बहनों— सृष्टि और प्रतिभा चौधरी ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और परिश्रम का भाव हो, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं है। आप दोनों ने इस विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्कारों का मान पूरे प्रदेश में बढ़ाया है। लेकिन याद रखिएगा, यह सफलता आपकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा की एक नई शुरुआत है।”

उन्होंने भावी चिकित्सकों को संदेश देते हुए आगे कहा, “चिकित्सा केवल एक पेशा या आजीविका कमाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ईश्वर द्वारा मानव जाति की सेवा के लिए प्रदान किया गया एक पवित्र अवसर है। आप लोग कल के डॉक्टर बनकर जब समाज में निकलेंगी, तो आपका प्राथमिक उद्देश्य केवल धन कमाना नहीं, बल्कि पीड़ित और निर्धन मानवता की सेवा होना चाहिए। आज देश को ऐसे संवेदनायुक्त और कुशल चिकित्सकों की आवश्यकता है जो गाँव और गरीब की पीड़ा को समझ सकें। आप दोनों एक संवेदनशील और निपुण चिकित्सक बनकर देश व समाज की निस्वार्थ सेवा करिए और अपने जीवन को सार्थक बनाइए। विद्यालय परिवार आपके उज्ज्वल, यशस्वी और सुखद भावी जीवन की ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना करता है।”

इसी क्रम में कार्यक्रम को संबल प्रदान करते हुए विद्यालय की आदरणीया उप प्रधानाचार्या रुक्मिणी उपाध्याय जी ने भी उपस्थित भैया-बहनों को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायी और सारगर्भित उद्बोधन में उन्होंने कहा, “सरस्वती शिशु मंदिर का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में उच्च नैतिक मूल्य, राष्ट्रीय चेतना और जीवन मूल्यों का सिंचन करना है। आज झंडा दिवस का यह अवसर हमें अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का बोध कराता है।”

सफल बहनों की सराहना करते हुए उप प्रधानाचार्या जी ने कहा, “बहन सृष्टि और बहन प्रतिभा चौधरी की यह ऐतिहासिक सफलता विद्यालय के अन्य सभी भैया-बहनों के लिए एक जीवंत प्रेरणापुंज है। यह सफलता इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि अनुशासित दिनचर्या, आचार्यों के सही मार्गदर्शन, कठिन परिश्रम और माता-पिता के आशीर्वाद से किसी भी उच्च लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। आप दोनों बहनों ने यह साबित किया है कि हमारी बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप दोनों अपने उत्कृष्ट कार्यों से भविष्य में भी विद्यालय, परिवार और गोरखपुर जनपद का नाम रोशन करती रहेंगी। विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी इनसे सीख लेकर अपने-अपने क्षेत्र में शीर्ष स्थान प्राप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।”

झंडा दिवस व प्रतिभा सम्मान के इस भव्य संयुक्त समारोह में विद्यालय प्रबंध समिति और आचार्य परिवार का पूर्ण सहयोग रहा। इस विशेष अवसर पर सत्यम शाह विचित्र कुमार सहित विद्यालय के समस्त आचार्य बंधु एवं भगिनी वृंद गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की रूपरेखा और पूरे सत्र का अत्यंत कुशल, सुव्यवस्थित और भावपूर्ण संचालन विद्यालय के मीडिया प्रभारी एवं वरिष्ठ आचार्य प्रेम सागर त्रिपाठी द्वारा किया गया। उन्होंने अपने प्रभावी संचालन से वंदना सभा में उपस्थित सभी विद्यार्थियों में कार्यक्रम के अंत तक ऊर्जा और उत्साह बनाए रखा।

समारोह के अंतिम चरण में संपूर्ण विद्यालय परिवार, आगंतुक अतिथियों, आचार्यों और भैया-बहनों द्वारा भारत माता के जयकारों और ‘वंदे मातरम्’ के अमर नारों के साथ संपूर्ण वातावरण को गुंजायमान कर दिया गया। तत्पश्चात, तिरंगे झंडे के सम्मान में पूरी गरिमा, अनुशासन और देशभक्ति के भाव के साथ सामूहिक ‘राष्ट्रगान’ (जन-गण-मन) के गायन के साथ इस ऐतिहासिक झंडा दिवस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का विधिवत सफल समापन हुआ

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