आसियान की परमाणु अपील पर उत्तर कोरिया की आपत्ति

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/07/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग के बाद उत्तर कोरिया ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की कड़ी आलोचना की है।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की बहन और प्रभावशाली अधिकारी किम यो-जोंग ने टिप्पणी की है कि आसियान का विचार ‘मूर्खतापूर्ण’ और ‘अवास्तविक’ है।

पिछले सप्ताह आयोजित आसियान क्षेत्रीय मंच ने उत्तर कोरिया के निरंतर परमाणु हथियारों के विकास पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के उद्देश्य से बातचीत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सुत्रो से जारी बयान में किम यो जोंग ने कहा कि भले ही उत्तर कोरिया का संविधान स्पष्ट रूप से देश को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए ‘परमाणु निरस्त्रीकरण’ की मांग करना रणनीतिक सोच की कमी है।

उन्होंने दावा किया कि कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की अवधारणा अब व्यावहारिक और राजनीतिक रूप से अर्थहीन हो गई है।

उन्होंने आसियान से अमेरिका के ‘मुखपत्र’ के रूप में काम नहीं करने को भी कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु नीति किसी भी परिस्थिति में नहीं बदलेगी और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के अपरिवर्तनीय आधार के रूप में प्रस्तुत किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया लंबे समय से अपने परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जारी रखे हुए है।

2023 में प्योंगयांग ने अपने संविधान में संशोधन किया और औपचारिक रूप से खुद को परमाणु शक्ति के रूप में शामिल किया।

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग-उन के बीच 2019 में आयोजित शिखर सम्मेलन निरस्त्रीकरण और प्रतिबंध हटाने पर किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहा।

तब से, उत्तर कोरिया ‘अपरिवर्तनीय परमाणु शक्ति’ होने के अपने रुख को दोहरा रहा है।

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