सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्रवाई में नेपाल सरकार, अवैध मदरसे दारुल उलूम अलसफा में मिले 2500 भारतीय बच्चे

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
25/08/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा के बाद सरकार की बड़ी कार्रवाई, बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे मदरसों में मिले 2500 भारतीय बच्चे?

नेपाल में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सरकार ने संवेदनशील इलाकों में धार्मिक संस्थानों और गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।

इस कार्रवाई के दौरान एक ऐसे मदरसे का मामला सामने आया है, जो कथित तौर पर बिना आधिकारिक पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था।

जांच के दौरान यहां बड़ी संख्या में भारतीय बच्चे धार्मिक शिक्षा लेते पाए गए।
जानकारी के मुताबिक, संबंधित मदरसे का नाम दारुल उलूम अल-सफा बताया जा रहा है।

अधिकारियों की जांच में यह बात सामने आई है कि यहां करीब 2500 भारतीय बच्चे पढ़ते हैं।

बताया गया है कि संस्था का जरूरी सरकारी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था, जिसके बाद प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सांप्रदायिक हिंसा के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
नेपाल में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सरकार ने कानून व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।

प्रशासन अब धार्मिक संस्थानों, शैक्षणिक केंद्रों और अन्य संवेदनशील गतिविधियों की जांच कर रहा है।

इस प्रक्रिया में मदरसे की गतिविधियों और वहां पढ़ने वाले छात्रों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

भारतीय बच्चों की मौजूदगी से उठे सवाल
मदरसे में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय बच्चों के मिलने के बाद सीमा पार से आने वाले छात्रों की व्यवस्था, उनके दस्तावेज, अभिभावकों की अनुमति और संस्थान की कानूनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, बच्चों के वहां पहुंचने और उनके रहने की पूरी प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की विस्तृत जांच अभी सामने नहीं आई है।

प्रशासन अभिलेखों की जांच कर रहा है
अधिकारी मदरसे से संबंधित दस्तावेजों, पंजीकरण की स्थिति और वहां संचालित शैक्षणिक गतिविधियों की जांच कर रहे हैं।

साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में विदेशी यानी भारतीय छात्रों को किस व्यवस्था के तहत शिक्षा दी जा रही थी।

कहा जा रहा है कि नेपाल सरकार की मौजूदा कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखना और बिना अनुमति या नियमों के चल रहे संस्थानों की पहचान करना है।

दारुल उलूम अल-सफा मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णय की स्थिति स्पष्ट होगी।

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