अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत शुरू

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
15/04/2026

काठमाण्डौ,नेपाल –  वाशिंगटन में इजराइल और लेबनान के राजदूतों के बीच दो घंटे तक चली ऐतिहासिक बैठक पूरी हो गई है, जिसका संचालन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया।

1993 से चल रही इस उच्च स्तरीय सीधी बातचीत में दोनों देश शांति समझौते के लिए आगे भी सीधी बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर युद्ध कम करने के लिए दबाव डाला और बातचीत का रास्ता खोला।

इससे पहले नेतन्याहू ने लेबनान की सीधी बातचीत की पेशकश को खारिज कर दिया था।

अमेरिका, इजरायली और लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत का मुख्य उद्देश्य लेबनान में हिजबुल्लाह के प्रभाव को कम करना और उसे निरस्त्र करना तथा लेबनानी सरकार को मजबूत करना है।

बैठक में लेबनानी राजदूत नादा हमादेह ने तत्काल युद्धविराम और नवंबर 2024 के समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने लेबनान में मानवीय संकट के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने को भी कहा है।

इजरायली राजदूत येचिएल लीटर का कहना है कि इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखेगा।

उन्होंने इसे एक सकारात्मक उपलब्धि माना, यह देखते हुए कि लेबनान को हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए दोनों पक्ष “समीकरण के एक ही पक्ष” पर थे।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों सरकारों के बीच किसी भी युद्धविराम समझौते की मध्यस्थता अमेरिका द्वारा की जानी चाहिए, न कि ईरान के दबाव में।

ईरानी और पाकिस्तानी मध्यस्थों ने दावा किया है कि हालिया ईरान-इज़राइल युद्धविराम लेबनान पर भी लागू होगा, लेकिन अमेरिका और इज़राइल इससे इनकार करते रहे हैं।

इस वार्ता को इज़राइल और लेबनान के बीच सीमा विवाद को सुलझाने, एक सुरक्षा समझौते तक पहुंचने और अंततः पूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने की दीर्घकालिक योजना के रूप में देखा जाता है।

दशकों के तनाव और हालिया भीषण युद्धों के बीच शुरू हुई इस सीधी बातचीत को मध्य पूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

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