नक्सल आंदोलन से बीजेपी तक: मिथुन चक्रवर्ती का दिलचस्प राजनीतिक सफर

 

गरीबों की सेवा करना ही मुख्य लक्ष्य है

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
10/05/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – फिल्मी दुनिया में मशहूर होने से पहले मिथुन चक्रवर्ती राजनीति में भी सक्रिय थे।

सुत्र के मुताबिक, 1960 के दशक में जब वह महाविद्यालय (कॉलेज) में पढ़ रहे थे, तब उन्होंने नक्सली आंदोलन में भाग लिया था।

अपने भाई की असामयिक मृत्यु के बाद उन्होंने पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ संभालने के लिए आंदोलन छोड़ दिया और अभिनय का रास्ता चुना।

मुंबई आकर एक सफल अभिनेता बनने के बाद भी उनकी वामपंथी विचारधारा से निकटता बनी रही।

वह पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बहुत करीबी थे और पार्टी के लिए मुफ्त कार्यक्रम करते थे।

दल परिवर्तन और राज्यसभा से इस्तीफा:

ज्योति बसु की मृत्यु के बाद वह वामपंथी राजनीति से दूर चले गए और 2014 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और राज्यसभा सदस्य बने।

हालांकि, 2016 में सारदा घोटाले से नाम जुड़ने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में उन्होंने टीएमसी से सांसद बनने को अपना ‘गलत फैसला’ भी बताया।

भाजपा में प्रवेश और कार्यालय पर आपत्ति:

2021 में मिथुन चक्रवर्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए।

जब वह बीजेपी में शामिल हुए तो उन्होंने साफ कर दिया कि वह किसी पद के लिए नहीं बल्कि गरीबों की सेवा करने और उन्हें सम्मान देने आये हैं।

मिथुन ने हमेशा कहा है कि उन्हें पद का लालच नहीं है और उन्होंने 18 साल की उम्र से गरीबों की मदद करने का सपना देखा है।

उन्होंने बंगाल चुनाव में गांव-गांव जाकर बीजेपी के लिए प्रचार किया, लेकिन वह कभी किसी पद की दौड़ में शामिल नहीं हुए।

बीजेपी में 5 साल रहने के बाद भी उन्होंने राज्यसभा जाने की इच्छा नहीं जताई।
भाजपा चाहती तो उन्हें आसानी से सांसद बना सकती थी।

हाल ही में जब बंगाल में कैबिनेट का गठन हुआ और मुख्यमंत्री का फैसला हुआ तो वह मंच पर मुस्कुराते नजर आए।

इससे यह पुष्टि होती है कि वह मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा से राजनीति में नहीं आये थे।

हालाँकि मिथुन चक्रवर्ती ने बंगाल की राजनीति में कड़ी मेहनत की, लेकिन उन्होंने कोई सरकारी पद नहीं लिया क्योंकि उन्होंने पद से ऊपर “गरीबों की सेवा” करने का अपना पुराना वादा निभाया।

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