गोरखपुर सांसद को दिखता है ‘स्पेन’, जनता पूछ रही—सड़कों के गड्ढे फिर किसकी नजर में?

 

रवि किशन के बयान पर मंच से लगे ठहाके, मीडिया ने पूछा—‘आंख का अंधा’ कौन? जवाब लेने पहुंचे तो मोबाइल नॉट रिचेबल

गोरखपुर के सांसद रवि किशन का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक आयोजन के दौरान सांसद ने मंच से कहा कि “मुझे गोरखपुर स्पेन लगता है, अगर तुम्हें स्पेन नहीं दिखता तो आंख के अंदर है, तुम आंख के अंधे हो तो हम क्या करें।” सांसद के इस बयान पर मंच पर मौजूद मंत्री, सांसद और विधायक भी ठहाके लगाते नजर आए।
मंच से निकला यह बयान अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों से होते हुए गोरखपुर की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। जनता पूछ रही है कि अगर सांसद को गोरखपुर ‘स्पेन’ जैसा विकसित नजर आता है, तो शहर के कई इलाकों में टूटी सड़कें, गड्ढे, जलभराव और बदहाल नालियां आखिर किसकी नजर में हैं?

‘आंख का अंधा’ कौन—जनता या सवाल पूछने वाला मीडिया?

सांसद के बयान में इस्तेमाल किए गए ‘आंख के अंधे’ वाले शब्द को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर सांसद ने यह टिप्पणी जनता के लिए की थी या उन लोगों के लिए, जिन्हें गोरखपुर की बदहाल सड़कें और जलभराव दिखाई दे रहे हैं? यह स्पष्ट करना अब सांसद की जिम्मेदारी है।
जनता का सीधा सवाल है—क्या विकास की तस्वीर केवल मंच से दिखाई देती है या फिर उसे सड़कों पर उतरकर भी देखा जाना चाहिए?
बरसात के मौसम में शहर के विभिन्न हिस्सों में जलभराव और खराब सड़कों की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सांसद के ‘स्पेन’ वाले बयान ने विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बहस को और तेज कर दिया है।

मीडिया ने मांगा जवाब, मोबाइल हुआ नॉट रिचेबल

सांसद के बयान पर उनका पक्ष जानने के लिए जब मीडिया की ओर से रवि किशन से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल ‘नॉट रिचेबल’ और ‘आउट ऑफ कवरेज’ बताया गया और संपर्क नहीं हो सका।
अब सवाल यह भी है कि जब सांसद ने मंच से गोरखपुर को ‘स्पेन’ बताया है, तो जनता और मीडिया के इन सवालों का जवाब कौन देगा?

गोरखपुर की जनता का सवाल साफ है—अगर शहर स्पेन जैसा दिखता है तो सड़कों के गड्ढे, जलभराव और बदहाल रास्ते किसकी आंखों से ओझल हैं?

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