आतंकवाद छोड़े पाकिस्तान, तभी भारत करेगा बात’, एक पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने खोली अपने ही देश की पोल

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उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
30/10/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को निमंत्रण भेजा है।

यह निमंत्रण नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच में भाग लेने के लिए भेजा गया है।

भारत ने इस बैठक के लिए एससीओ के सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा है। पाकिस्तान भी SCO का सदस्य है।
ऐसे में उन्हें भी निमंत्रण मिला है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत और पाकिस्तान बातचीत शुरू कर सकते हैं।

क्या भारत पाकिस्तान से बातचीत करेगा

पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी ने विशेषज्ञ शकील चौधरी से उनके यूट्यूब चैनल पर पूछा कि क्या नई दिल्ली और इस्लामाबाद बातचीत की मेज पर बैठ सकते हैं और इसकी कितनी संभावना है?

चौधरी ने कहा कि जब तक हम आतंकवाद को लेकर गंभीर नहीं होंगे तब तक भारत पाकिस्तान से बात नहीं करेगा।

चौधरी ने कहा कि भारत कभी भी तनाव बढ़ाना नहीं चाहेगा क्योंकि नई दिल्ली का ध्यान विकास पर है।

उन्होंने तर्क दिया कि अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे रहें, सीमा पर तनाव न हो तो भारत की प्रगति बढ़ेगी।

उनकी विकास दर बढ़ेगी. ऐसे में भारत पाकिस्तान के साथ युद्ध जैसा माहौल नहीं चाहेगा।

पाकिस्तान में चरमपंथ के पीछे भारत

आरजू काज़मी ने पाकिस्तान में हो रहे चरमपंथी हमलों की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि इसके पीछे पाकिस्तानी सरकार का हाथ है।

इस पर चौधरी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि भारत की सीमा न तो बलूचिस्तान से है और न ही खैबर पख्तूनख्वा से। इसलिए भारत के लिए वहां हस्तक्षेप करना बहुत मुश्किल है।

उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य जनरलों के बयानों को याद करते हुए कहा कि 2016 में राहील शरीफ ने कहा था कि इस साल आतंकवाद को खत्म कर दिया जाएगा। क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि अगर आपको अब भी लगता है कि भारत ऐसा कर रहा है तो पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में जाकर सबूत पेश करना चाहिए।

दुनिया को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं

शकील चौधरी ने कहा कि हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री भारत आये थे। उस दौरान पाकिस्तान का नाम लेकर दोनों देशों के संयुक्त बयान की आलोचना की गई थी।

शकील ने इसे बहुत बड़ी घटना बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ऐसा बहुत कम होता है जब किसी देश का नाम लेकर उसकी आलोचना की जाती है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले 2010 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी पाकिस्तान का नाम लेकर आलोचना की थी।

चौधरी ने कहा कि दुनिया पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करती।

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