गोरखपुर। नागरिक सुरक्षा संगठन (सिविल डिफेंस), गोरखपुर के 63वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित रूट मार्च एवं वार्डन सम्मान समारोह के दौरान जनजागरूकता, तकनीकी सशक्तिकरण और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग पर विशेष रूप से बल दिया गया। शनिवार, 20 दिसम्बर 2025 को एम.एस.आई. इंटर कॉलेज सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों ने सिविल डिफेंस की भूमिका को और अधिक मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी एवं नियंत्रक नागरिक सुरक्षा दीपक मीणा ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया सबसे सुलभ, प्रभावी और तेज माध्यम है, जिसके जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक एक साथ संदेश पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने सिविल डिफेंस संगठन से अपील की कि सोशल मीडिया को और अधिक सक्रिय किया जाए तथा इसके लिए एक समर्पित आईटी टीम का गठन किया जाए। यह टीम फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक आपदा प्रबंधन, ब्लैक आउट, प्राथमिक उपचार, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन व्यवहार से जुड़ी जानकारी नियमित रूप से पहुंचाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि नागरिकों को जागरूक करना सिविल डिफेंस का प्रमुख दायित्व है और सोशल मीडिया इस दिशा में सबसे सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे वीडियो, इन्फोग्राफिक्स, लाइव सेशन और मॉक ड्रिल के क्लिप साझा कर आमजन, विशेषकर बच्चों और युवाओं को आसानी से जागरूक किया जा सकता है। डीएम ने यह भी कहा कि सिविल डिफेंस पहले से ही एक सक्रिय संस्था है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी सक्रियता इसे और प्रभावी बना देगी।
अपने संबोधन में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने ब्लैक आउट जैसी आपात स्थितियों के दौरान बच्चों को विशेष रूप से जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्लैक आउट या किसी भी आपात स्थिति में अक्सर छोटे बच्चे घबरा जाते हैं, इसलिए स्कूलों, मोहल्लों और सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों को सरल भाषा में जानकारी दी जानी चाहिए कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि अंधेरे में शांत रहना, सुरक्षित स्थान पर रहना और बड़ों के निर्देशों का पालन करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
डीएम ने आपातकालीन घटनाओं के दौरान लोगों की मनोवैज्ञानिक स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कई बार किसी घटना के दौरान कुछ लोग एक दिशा में भागते हैं, तो कुछ लोग दूसरी दिशा में। यदि कोई व्यक्ति घबराकर वहां से भाग जाता है, तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह डरपोक है। उस समय व्यक्ति के दिमाग में जो पहला विचार आता है, वह उसी के अनुसार प्रतिक्रिया करता है। इसे समझना और स्वीकार करना जरूरी है। ऐसे में सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे लोगों को सही दिशा दिखाएं, उन्हें शांत करें और सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में मदद करें।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राज करन नय्यर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आपदा या किसी अप्रिय घटना के समय अफवाहें तेजी से फैलती हैं, खासकर सोशल मीडिया के माध्यम से। ऐसे में सिविल डिफेंस की आईटी टीम की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सही, प्रमाणिक और समय पर सूचना लोगों तक पहुंचाकर अफवाहों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस और सिविल डिफेंस के बीच बेहतर समन्वय से किसी भी स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने कहा कि सिविल डिफेंस केवल आपदा के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी समाज को सजग और जागरूक बनाने का कार्य करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम स्तर, वार्ड स्तर और शहरी क्षेत्रों में सोशल मीडिया ग्रुप बनाकर स्थानीय समस्याओं, आपदा की चेतावनी और सुरक्षा संबंधी सूचनाएं साझा की जाएं। इससे प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा।
सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति पद से सम्मानित नीरज श्रीवास्तव, चीफ वार्डन संजीव गुलाटी, उप नियंत्रक सत्य प्रकाश सिंह सहित अनेक वार्डनों और स्वयंसेवकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विशेष रूप से नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करने वाली महिला वार्डनों की भूमिका की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि महिला स्वयंसेवक आपदा के समय बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नागरिक सुरक्षा संगठन के डिवीजनल वार्डन (आ.) नैय्यर आलम ने कहा कि संगठन भविष्य में सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक प्रशिक्षण सामग्री साझा करेगा। उन्होंने बताया कि ब्लैक आउट, भूकंप, अग्निकांड और बाढ़ जैसी आपदाओं से संबंधित जागरूकता वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित स्टाफ ऑफिसर मनोज कानोडिया, रागिनी जायसवाल, जितेन्द्र देव उपाध्याय सहित अन्य अधिकारियों ने भी विचार व्यक्त किए और कहा कि आईटी टीम के गठन से युवाओं को संगठन से जोड़ने में मदद मिलेगी। युवा तकनीक के माध्यम से सिविल डिफेंस के संदेश को घर-घर तक पहुंचा सकते हैं।
समारोह के अंत में यह संदेश दिया गया कि सिविल डिफेंस एक अनुशासित, सक्रिय और जनहितकारी संस्था है। सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग, आईटी टीम के गठन और बच्चों व आम नागरिकों की जागरूकता से यह संगठन और अधिक सशक्त बनेगा कार्यक्रम का संचालन अमरनाथ जयसवाल द्वारा किया गया।

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