चीन ने दुनिया की पहली 6G चिप बनाई है, जो आधे सेकंड में 50GB की मूवी डाउनलोड करेगी

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
24/12/2025

काठमाण्डौ,नेपाल – चीन ने एक बार फिर खुद को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के फील्ड में दुनिया का लीडर साबित किया है और दुनिया की पहली 6G चिप पेश की है। यह दूर-दराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट देगी।

चीनी साइंटिस्ट्स ने एक पतली लिथियम नाइओबेट फोटोनिक मटीरियल मेम्ब्रेन और एक नए स्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके एक हाई-स्पीड वायरलेस कम्युनिकेशन चिप बनाई है।

खबरों के मुताबिक, 6G चिप मौजूदा इंटरनेट स्पीड के मुकाबले 5,000 गुना तेज इंटरनेट स्पीड देगी।

इससे दुनिया के उन ग्रामीण इलाकों को भी फायदा होगा, जहां अभी तक हाई-स्पीड इंटरनेट नहीं पहुंचा है। यह चिप भविष्य के 6G इंटरनेट की रिलायबिलिटी और कैपेसिटी को बढ़ाएगी।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीनी रिसर्चर्स ने इसे बीजिंग की पेकिंग यूनिवर्सिटी और हांगकांग की सिटी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के साथ मिलकर बनाया है।

नेचर जर्नल में छपी रिसर्च के मुताबिक, इसे सभी फ्रीक्वेंसी पर चलने वाली 6G टेक्नोलॉजी कहा जाता है, जिससे मोबाइल स्पीड कई गुना बढ़ जाएगी। कहा जा रहा है कि यह इंटीग्रेटेड ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक फ्यूजन टेक्नोलॉजी पर आधारित है।

चीन में तैयार किया गया 6G चिपसेट 11 मिलीमीटर गुणा 1.7 मिलीमीटर साइज़ का है। यह चिपसेट कम फ्रीक्वेंसी पर भी काम कर सकता है। इससे मोबाइल और दूसरे डिवाइस पर बेहतरीन इंटरनेट स्पीड के साथ अच्छी कनेक्टिविटी मिलेगी।

वायरलेस कम्युनिकेशन की नई जेनरेशन के तौर पर, 6G इंटरनेट के लिए अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड में हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन की ज़रूरत होती है। यह ज़रूरत 6G चिप से पूरी होगी।

6G चिपसेट की मदद से एक सेकंड में 100 GB तक डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है। यह पूरी तरह से वायरलेस स्पेक्ट्रम में काम करेगा।

6G चिप से मिलने वाली इंटरनेट स्पीड इतनी पावरफुल होगी कि 50 GB की HD 8K मूवी आधे सेकंड में डाउनलोड की जा सकेगी। दावा है कि इतनी इंटरनेट स्पीड सिर्फ़ शहरी इलाकों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी मिल सकती है।

चिपसेट असल में मोबाइल या किसी भी स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए इंसानी दिमाग जैसा है। यह मेमोरी, स्टोरेज, ग्राफिक्स और दूसरे हार्डवेयर के बीच कम्युनिकेशन बनाता है। कुछ लोगों ने दावा किया है कि 6G की हाई इंटरनेट स्पीड से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का खतरा बढ़ जाएगा और यह इंसानी सेहत के लिए नुकसानदायक होगा।

साथ ही, कुछ का कहना है कि हाई-स्पीड इंटरनेट से साइबर अटैक का खतरा भी बढ़ जाएगा और डेटा प्राइवेसी को भी खतरा होगा।

याद रखें कि मौजूदा 5G टेक्नोलॉजी लिमिटेड फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करती है।

जबकि 6G चिप 0.5 GHz से 115 GHz तक पूरे स्पेक्ट्रम में काम करेगी।

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