नेपाल दंगों में पाकिस्तानी मौलाना का नाम, भारतीय सीमा पर ISI की नई साजिश

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
15/08/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत से सटे नेपाल के सुनसारी जिले में 26 जुलाई की रात हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कथित भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

शुरुआती ख़ुफ़िया रिपोर्ट से जुड़े दावों में सीमावर्ती इलाकों में विदेशी मौलवियों की गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की जांच की सिफारिश की गई है। हालाँकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होनी बाकी है।

सुनसरी जिला के देवगंज ग्रामीण नगर पालिका क्षेत्र के कप्तानगंज इलाके में धार्मिक झंडे और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हो गया।
देखते ही देखते विवाद हिंसा में बदल गया।

पुलिस के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें एक शख्स की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इसके बाद हिंसा दूसरे इलाकों तक पहुंच गई और प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा।

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल की खुफिया एजेंसी की शुरुआती रिपोर्ट में सुनसारी जिला में पाकिस्तानी मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमन और काठमाण्डौ की एक मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबू बकर कासमी की मौजूदगी का भी जिक्र है।

भारत से सटे संवेदनशील इलाकों में विदेशी धार्मिक लोगों के दौरे की भी जांच करने की बात कही गई है।

हालाँकि, इन लोगों की मौजूदगी को सीधे तौर पर हिंसा से जोड़ने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

हिंसा के बाद नेपाल में सीमावर्ती इलाकों में विदेशी फंडिंग और मस्जिद-मदरसा गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत में भी नेपाली नागरिकों पर कथित आईएसआई नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप सामने आए हैं।

हालाँकि, इन पिछले मामलों को सुनसारी जिला में वर्तमान हिंसा से सीधे जोड़ने के लिए अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।

नेपाल सरकार ने सुनसारी हिंसा की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

31 जुलाई तक की रिपोर्टों में कहा गया कि हिंसा में कम से कम तीन लोग मारे गए और 25 घायल हो गए।

ऐसे में आईएसआई की कथित भूमिका, विदेशी मौलानाओं की गतिविधियां और किसी संभावित नेटवर्क के दावों की असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

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