उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
27/10/2026
काठमाण्डौ,नेपाल – इजराइल में आज, मंगलवार (27 अक्टूबर) को आम चुनाव हो रहे हैं।
चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या देश में नई सरकार बनेगी।
1996 से लेकर अब तक अलग-अलग समय में नेतन्याहू 17 साल से ज्यादा समय तक इजराइल के प्रधानमंत्री रहे हैं।
उनके समर्थक उन्हें सुरक्षा मामलों में एक मजबूत नेता के तौर पर पेश करते रहे हैं।
लेकिन आलोचकों ने 7 अक्टूबर, 2023 के दौरान सुरक्षा में चूक, हमास के हमले और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने गाजा में युद्ध के दौरान किए गए कथित युद्ध अपराधों के लिए नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
नेतन्याहू के खिलाफ कौन है
इस चुनाव में नेतन्याहू को चुनौती देने के लिए पूर्व सैन्य प्रमुख गादी ईसेनकोट अपनी नई मध्यमार्गी पार्टी ‘यशेर’ के साथ मैदान में हैं।
गाजा में युद्ध के दौरान ईसेनकॉट ने अपने बेटे को खो दिया।
इसी तरह, पूर्व प्रधान मंत्री नफ्ताली बेनेट और नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी और पूर्व कमांडो यायर लैपिड ने ‘टुगेदर’ गठबंधन के माध्यम से सहयोग किया है।
पूर्व रक्षा मंत्री एविग्डोर लिबरमैन को भी नेतन्याहू के बड़े आलोचक के रूप में देखा जाता है।
कभी नेतन्याहू के करीबी सहयोगी रहे लिबरमैन के नेतृत्व वाली ‘इज़राइल अवर होम’ पार्टी को पूर्व सोवियत संघ से इज़राइल आए अप्रवासी समुदाय का महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है।
नेतन्याहू दक्षिणपंथी नेताओं के साथ
नेतन्याहू की सरकार को वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गाविर जैसे दक्षिणपंथी नेताओं का समर्थन प्राप्त है।
वे फ़िलिस्तीनियों के प्रति अपनी कठोर नीतियों और वेस्ट बैंक में इज़रायली बस्ती विस्तार के लिए अपने समर्थन के लिए अंतरराष्ट्रीय आलोचना के घेरे में आ गए हैं।
इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नेतन्याहू का समर्थन करते रहे हैं।
चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला राजनीतिक गठबंधन कितनी सीटें जीतेगा, इससे अगली सरकार का स्वरूप तय होगा।
विपक्षी दलों के बीच सहयोग और छोटे दलों का समर्थन भी सरकार गठन के लिए निर्णायक हो सकता है।
सरकार बनाने के लिए चाहिए 61 सीटें
इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
इज़राइल में मतदाता सीधे तौर पर किसी एक उम्मीदवार को वोट नहीं देते, बल्कि एक राजनीतिक दल को वोट देते हैं।
संसद में सीटों का वितरण पार्टियों को प्राप्त वोटों के अनुपात के आधार पर किया जाता है।
इस व्यवस्था के कारण किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों का गठबंधन आवश्यक होता है।
इसलिए, न केवल चुनाव में सबसे अधिक वोट पाने वाली पार्टी, बल्कि संभावित गठबंधनों का अंकगणित भी नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य तय करेगा।

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