श्रीलंका धमाकों में 15 लोग दोषी करार

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
23/09/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – श्रीलंका की एक अदालत ने मंगलवार को 15 लोगों को ईस्टर 2019 पर चर्चों और होटलों में बम विस्फोटों की योजना बनाने और तैयारी में सहायता करने का दोषी पाया।

इस घटना में 267 लोगों की मौत हो गई। इसी मामले में आरोपित नौ लोगों को कोर्ट ने बरी कर रिहा कर दिया है।

21 अप्रैल, 2019 को इस्लामिक स्टेट से प्रेरित आत्मघाती हमलावरों ने तीन चर्चों और तीन होटलों में विस्फोट किया, जिसमें 42 विदेशी नागरिकों सहित 267 लोग मारे गए और 574 घायल हो गए। सीधे हमले में शामिल सभी हमलावरों की मौत हो गई है।

हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दोषी पाए गए लोगों की संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है।

2021 में 25 लोगों के खिलाफ हत्या, आतंकवादी गतिविधियों की साजिश और आग्नेयास्त्रों और विस्फोटकों से संबंधित 23,270 आरोप दर्ज किए गए। मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि प्रतिवादी ईसाइयों और पर्यटकों को निशाना बनाने वाले योजनाबद्ध हमलों में शामिल थे।

अदालत में पेश किए गए वीडियो में हमलावर को इस्लामिक स्टेट के तत्कालीन नेता अबू बक्र अल-बगदादी के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हुए दिखाया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषी पाए गए प्रतिवादियों में से एक सीरिया गया और इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ा।

अदालत ने कुछ प्रतिवादियों को कड़ी मेहनत के साथ 200 से 260 साल तक की जेल की सजा सुनाई।

धार्मिक नेता मोहम्मद इब्राहिम मोहम्मद नौफर को 220 साल और मोहम्मद इब्राहिम सादिक अब्दुल्ला को 240 साल की सजा सुनाई गई है। दोषी पाए गए लोगों को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है।

विस्फोट के बाद आरोप लगे कि हमलावरों और राज्य की ख़ुफ़िया सेवा के बीच कोई संबंध था।

हालाँकि रक्षा मंत्रालय ने इसका खंडन किया, संसदीय समिति ने निष्कर्ष निकाला कि पुलिस और ख़ुफ़िया अधिकारियों ने प्राप्त अग्रिम सूचना में पर्याप्त कदम नहीं उठाए थे।

इस साल, पूर्व खुफिया प्रमुख सुरेश सल्ली को गिरफ्तार किया गया था, जबकि एक पूर्व पुलिस प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को संभावित हमले की चेतावनी पर कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।

फैसले का स्वागत करते हुए कैथोलिक चर्च ने कहा कि घटना के असली मास्टरमाइंड के बारे में अभी भी सवाल हैं।

चर्च के प्रवक्ता रेव जूड क्रिसांथा फर्नांडो ने कहा कि फैसले से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

एक अन्य पुजारी रेव दिलन परेरा ने कहा कि चूंकि श्रीलंका एक बहु-सांस्कृतिक, बहु-जातीय और बहु-धार्मिक समाज है, इसलिए धर्म के नाम पर हिंसा नहीं की जानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *