राम के चरित्र व आदर्शों को आत्मसात कर जीवन बनाएं धन्य: आचार्य रामरक्षा उपाध्याय



महराजगंज जनपद के घुघली के लक्ष्मीपुर शिवाला में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते आचार्य रामरक्षा उपाध्याय
भगवान राम,परमात्मा विष्णु के सातवें और सर्वश्रेष्ठ अवतार थे।त्रेतायुग में धरती पर धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश के लिए वे अयोध्या में राजा दशरथ व माता कौशिल्या के पुत्र के रूप में जन्म लिए ।आदर्शों व मर्यादाओं के पालन करने के कारण वे सर्वश्रेष्ठ पुरूष अर्थात मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाए।उनके चरित्र व आदर्शों को आत्मसात कर हमें अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।यह बातें घुघली के लक्ष्मीपुर शिवाला स्थित दलसिंगार भवन के जगदीश्वर प्रज्ञा पंडाल में मुख्य यजमान गिरिजा देवी दास को श्रीमद्भागवत कथा सुनाते वैदिक विद्वान आचार्य रामरक्षा उपाध्याय ने कही।उन्होंने कहा कि मर्यादा का अर्थ सम्मान, नैतिकता, नियम,अनुशासन व आत्मनियंत्रण है जबकि पुरुषोत्तम का अर्थ पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ या सर्वोच्च पुरूष है।भगवान राम राज्य,पत्नी तथा अन्य सुखों के त्याग जैसी सभी कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों एवं संयम को नहीं छोड़े।पार्थिव पूजन एवं माला सुमिरन का कार्य सहायक आचार्य पंडित मनोज पांडेय ने किया।इस अवसर पर मिथिलेश देवी, शिवकुमार पटेल,आकाशमणि पटेल,कृष्णमोहन पटेल, प्रेमलता पटेल,राजीव पटेल,अंजनी पटेल,मंशा पटेल,नीरज पटेल, सत्यभामा पटेल,रविंद्र पटेल,रानी पटेल,आराधना पटेल ,रूबी पटेल , राजन पटेल,निकिता पटेल,पल्लवी पटेल,आयुषी पटेल,ऋतिक पटेल,अन्वी पटेल, वैभव पटेल आदि सहित स्वजनों, सगे संबंधियों एवं ग्रामवासियों ने अमृत कथा का रसपान किया।

 

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