चागोस विवादः भारत के लिए नया सिरदर्द !

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
21/02/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – मालदीव ने फिर बदला अपना रंग!
भारत के लिए एक और नई चुनौती।
राष्ट्रपति मुइज्जू ने ‘चागोस द्वीप समूह’ से मुंह मोड़ लिया है और अब पूरे द्वीप पर मालदीव का अधिकार जता रहे हैं।

लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह है कि ‘इंडिया आउट’ का नारा देने वाले मुइज्जू अब वहां ‘अमेरिकी सैन्य अड्डे’ को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं!

चागोस द्वीप विवाद क्या है? (इतिहास)

  • ब्रिटेन का कब्ज़ा: 1965 में ब्रिटेन ने इन द्वीपों को मॉरीशस से अलग करके अपने पास रख लिया।
  • अमेरिकी सैन्य अड्डा: ब्रिटेन ने अमेरिकी सैन्य अड्डा बनाने के लिए ‘डिएगो गार्सिया’ नामक द्वीप पट्टे पर ले लिया।
  • अंतर्राष्ट्रीय निर्णय: अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चागोस पर वास्तविक अधिकार मॉरीशस का है और ब्रिटेन को इसे वापस करना चाहिए।

मालदीव का ‘यू-टर्न’
मालदीव और चागोस द्वीप आपस में सटे हुए हैं, जिससे दोनों के बीच समुद्री सीमा विवाद पैदा हो गया है।

  • पुराना सरकारी पेड़:

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने मॉरीशस के अधिकार को स्वीकार कर लिया और एक न्यायाधिकरण (आईटीएलओएस) ने समुद्री सीमा को विभाजित कर दिया।

  • मुइज्जू का नया दावा: मौजूदा राष्ट्रपति मुइज्जू ने इस फैसले को रद्द कर दिया है. वे अब न केवल समुद्र के उस हिस्से, बल्कि पूरे चागोस द्वीप समूह को मालदीव के रूप में दावा कर रहे हैं।

मुइज्जू का असली उद्देश्य क्या है?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस विवाद का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।

मुइज्जू यह कदम अप्रैल 2026 में होने वाले स्थानीय चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठा रहे हैं, ताकि वह खुद को लोगों के सामने एक कट्टर ‘राष्ट्रवादी नेता’ साबित कर सकें।

भारत के लिए यह ‘सिरदर्द’ क्यों है?

भारत ने इस मुद्दे पर हमेशा मॉरीशस का समर्थन किया है। मुइज्जू का कदम भारत की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ा रहा है:

1. दोहरा रवैया:

मुइज्जू ने ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाकर 80 निहत्थे भारतीय सैनिकों को मालदीव से निकाल दिया, लेकिन अब वे कह रहे हैं कि अगर चागोस को मालदीव मिला तो वे वहां विशाल ‘अमेरिकी सैन्य अड्डे’ को संचालित करने की अनुमति देंगे।

2. क्षेत्रीय सुरक्षा:

भारत को अपने पड़ोस (दक्षिण एशिया) में विदेशी सैनिकों का भारी जमावड़ा पसंद नहीं है।

3. हथियारों की होड़:

मालदीव अब तुर्की से हथियार खरीदकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। मुइज्जू का झुकाव भी चीन की ओर है। ये सब हिंद महासागर क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा ख़तरा है।

निष्कर्ष:

चुनाव जीतने के लिए मालदीव द्वारा उठाया गया यह कदम पूरे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर की भू-राजनीति को अस्थिर कर सकता है।

4
3
1
5
6
7
2

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *