“विश्व तेल अराजकता: अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की अनुमति दी!”

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
06/03/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसके गंभीर प्रभाव को देखते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ‘अस्थायी राहत’ की घोषणा की है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को अगले 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की विशेष अनुमति (छूट) दी है।

सुत्र के मुताबिक, इस फैसले की घोषणा अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने की।

उन्होंने इसे ”अस्थायी और अल्पकालिक कदम” बताया। जैसा कि विभाग ने स्पष्ट किया है, यह छूट केवल उन तेल कार्गो के लिए है जो वर्तमान में समुद्र में फंसे हुए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।

वर्तमान में मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण तेल परिवहन का मुख्य मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो गया है।

विश्व की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।

भारत अपनी तेल ज़रूरत का लगभग 40 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आयात करता है। युद्ध की वर्तमान स्थिति ने विश्व बाजार में तेल की कमी और कीमतें आसमान छूने की आशंका पैदा कर दी है।

अमेरिका ने यह कदम अपने ‘महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार’ भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया है।

भारत-अमेरिका संबंध

पिछले कुछ महीनों से अमेरिका भारत पर रूसी तेल की खरीद कम करने का दबाव बना रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में मॉस्को पर आर्थिक नाकेबंदी लगाने के अमेरिका के प्रयासों का भारत ने भी समर्थन किया।

अभी हाल ही में, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में कटौती के बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटा दिया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध और मजबूत हुए।

इस मौजूदा छूट को ‘विशेष अपवाद’ के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय भारत की लंबे समय से चली आ रही ‘ऊर्जा सुरक्षा’ चिंताओं को दूर करने के लिए लिया गया था।

हालाँकि, अमेरिका को अभी भी उम्मीद है कि भारत भविष्य में रूसी निर्भरता को पूरी तरह से त्याग देगा और अमेरिकी ऊर्जा स्रोतों पर अधिक भरोसा करेगा।

30 दिन की छूट ने भारत सरकार और निजी रिफाइनरों के लिए समुद्र में फंसे तेल टैंकरों को भारतीय बंदरगाहों तक लाने का रास्ता खोल दिया है, जिससे माना जा रहा है कि इससे फिलहाल भारत में ईंधन की कमी नहीं होगी।

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