भारत फ्रांस और जर्मनी के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (एफसीएएस) कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना पर विचार कर रहा है

 

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
06/03/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – भारत के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) कार्यक्रम में शामिल होने का विचार एक रणनीतिक कदम है, जो स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) परियोजना के पूरक के रूप में काम कर सकता है।

मार्च 2026 की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने फ्रांस के नेतृत्व वाले इस 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट कार्यक्रम में अपनी गहरी रुचि दिखाई है।

इस संभावित साझेदारी और एएमसीए की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण नीचे दिया गया है।

एफसीएएस कार्यक्रम में भारत की संभावनाएं
प्रस्ताव और चर्चा:

फरवरी 2026 में बेंगलुरु में आयोजित भारत-फ्रांस रक्षा वार्ता के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एफसीएएस कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा।

भारत इस परियोजना में सह-विकास और सह-निर्माण के लिए तैयार है।

यूरोपीय विवाद:

कार्यक्रम वर्तमान में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के बीच है, लेकिन कार्य-शेयर और बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकारों पर विवाद चल रहे हैं।

यदि जर्मनी कार्यक्रम से हट जाता है, तो भारत एक प्रमुख भागीदार के रूप में शून्य को भरने के लिए तैयार है।

रणनीतिक लाभ:

एफसीएएस में शामिल होने से भारत को कॉम्बैट क्लाउड नेटवर्किंग, मानवयुक्त-मानवरहित टीमिंग और उन्नत प्रणोदन जैसी छठी पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों तक सीधी पहुंच मिल जाएगी।

स्वदेशी एएमसीए की समयसीमा
भारत का मुख्य फोकस अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA पर है, जिसकी अनुमानित समयसीमा इस प्रकार है:

AMCA Mk1 (5वीं पीढ़ी):

इसकी पहली उड़ान 2028-29 के आसपास और 2034-35 तक वायु सेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसमें वर्तमान में उपलब्ध इंजनों का उपयोग किया जाएगा।

AMCA Mk2 (5.5 Gen):

इसे 2035-2038 के बीच शामिल करने का लक्ष्य है। इसमें एक नया 120kN इंजन और 6वीं पीढ़ी का AI-आधारित सिस्टम होगा जिसे फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

एफसीएएस को “भविष्य का विकल्प” क्यों?
जोखिम को कम करना:

एएमसीए जैसे जटिल कार्यक्रमों में देरी की संभावना होती है। एफसीएएस में शामिल होना भारत के लिए एक बचाव की तरह होगा, जिससे वायुसेना की युद्धक क्षमता में कोई कमी नहीं आएगी।

तकनीकी छलांग:

जहां AMCA भारत के 5वीं पीढ़ी के क्लब में शामिल हो जाएगा, वहीं FCAS भारत को भविष्य के युद्धक्षेत्र में बढ़त दिलाने के लिए सीधे 6वीं पीढ़ी की तकनीक प्रदान कर सकता है।
इंजन विकास:

फ्रांस के साथ एफसीएएस में सहयोग से भारत को अपने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन के विकास में महारत हासिल करने में मदद मिलेगी।

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