8 साल में 170 से ज्यादा अज्ञात शव,एक की भी नहीं हुई शिनाख्त

रायबरेली जिले में कहां से आई इस जिले में 170 से ज्यादा अज्ञात शव जिनका अंतिम संस्कार कराने वाले भी आज तक खुद नहीं पहचान पाए। जी हां उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की बात करें तो कानून व्यवस्था के नाम पर यह जिला काफी साफ सुथरा और शांतिप्रिय दिखाई देता है। लेकिन एक व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा 8 सालों से 170 से ज्यादा अज्ञात शवो के अंतिम संस्कार किए जाने की बात ने यह सवाल जरूर पैदा कर दिया है कि आखिरकार इस जिले में इतनी ज्यादा मात्रा में अज्ञात लाशे कहां से आ रही है। व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जीसी चौहान का कहना है कि बीते 8 वर्षों से उन्होंने अब तक 170 से ज्यादा लाशों का अंतिम संस्कार करवाया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की मदद से उन्हें अज्ञात शवो के अंतिम संस्कार करने में भले ही मदद मिल जाती हो । लेकिन आज तक किसी भी अज्ञात शवो का ना तो पुलिस प्रशासन द्वारा और ना ही किसी परिजन द्वारा खोजबीन करने की कोशिश की गई । उन्होंने कहा कि तमाम ऐसे शव मिले हैं कि जिन्हें देखकर साफ-साफ पता चलता था कि इन लोगों की मौत कहीं ना कहीं रहस्य में ढंग से हुई है । कुछ ऐसी भी लाशे मिली है जिनके आधे अधूरे शरीर का आज भी कोई अता-पता नहीं चल पाया है। लेकिन उन्हें भी अज्ञात शवो की लिस्ट में डालकर उनका अंतिम संस्कार करवा दिया गया। आश्चर्यजनक रूप से प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि बीते कुछ महीनो से तो एक दो लाशे हर तीसरे चौथे दिन बरामद हो रही है। लेकिन बीते 8 सालों से मिले शवो में से आज तक किसी की भी शिनाख्त ना तो पुलिस ने की और ना ही किसी के परिजन द्वारा ही खोजबीन के नाम पर उनसे संपर्क किया । चैनल इस खबर के माध्यम से यह भी बताना चाहता है कि जिनके परिजन लंबे समय से लापता है। वह एक बार व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जी सी चौहान से संपर्क कर अपने परिजनों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते है। कहीं ऐसा तो नहीं की उनके परिजनों का यहां अंतिम संस्कार भी हो गया हो और परिवार वाले आज भी गुमशुदा के नाम पर अपने घर वालों को खोज रहे हो। वही कानून व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है कि इतनी भारी मात्रा में यदि जिले में शव बरामद हो रहे हैं तो पुलिस क्या केवल उनका पंचनामा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक ही रखकर मामले को समाप्त कर देती है। क्योंकि 8 साल कम समय नहीं होता है और जब इतने लंबे समय से अभी तक एक भी लाशों की शिनाख्त नहीं हो पाई तो क्या यह समझा जाए कि इस जिले में शव फेंक देना अपराधियों के लिए सबसे महफूज गढ़ बन गया। क्योंकि जहां अभी तक इतनी भारी संख्या में मिली लाशों की शिनाख्त तक पुलिस नहीं करा पाई तो इनको मौत के कारणों का और अपराधियों पर शिकंजा पुलिस कब कसेगी ? यह तो सोचना भी सही नहीं होगा मात्र कल्पना ही की जा सकती है कि आज तक जिले में मिले 170 लोगों की आत्माओ को न्याय चाहिए। क्योंकि भले ही उनका अंतिम संस्कार हो गया हो लेकिन उनकी मौत की वजह को जिस तरह में गर्त में रखा गया है। वह कानून व्यवस्था पर भी उंगली उठाता है।

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