उर्वरक सब्सिडी पर 59 अरब रुपए का बोझ, बजट प्रबंधन चुनौतीपूर्ण”

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रासायनिक उर्वरकों की कमी को रोकने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता

उप सम्पादक जीत बहादुर चौधरी की रिपोर्ट
01/10/2026

काठमाण्डौ,नेपाल – हालांकि कृषि, वानिकी और पर्यावरण मंत्रालय ने आगामी सीजन में रासायनिक उर्वरकों की कमी को रोकने का वादा किया है, लेकिन कहा है कि बजट प्रबंधन में एक बड़ी चुनौती है।

कृषि, वानिकी एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि राज्य के लिए मौजूदा सब्सिडी का बोझ उठाना मुश्किल है और कहा कि इसके प्रबंधन के लिए नयी पद्धति की तलाश की जा रही है।

गुरुवार को संघीय संसद की कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन समिति की बैठक में सचिव मिश्रा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मौजूदा बाजार मूल्य पर सब्सिडी 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक होनी चाहिए।

अनुमान है कि इसके लिए करीब 59 अरब रुपये के बजट की जरूरत होगी।

हालांकि वित्त मंत्रालय से समन्वय है, लेकिन इतनी बड़ी रकम जुटाना सरकार के लिए चुनौती बन गई है।

उन्होंने बताया कि उर्वरकों की सुगम आपूर्ति के लिए फरवरी के बाद क्रियान्वित की जाने वाली कार्ययोजना को आगे बढ़ा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अप्रैल से जून और जुलाई के मुख्य सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग अधिक होगी, उसी के अनुरूप तैयारी की जा रही है।

समिति की बैठक में सचिव मिश्रा ने कहा, ”उर्वरक की समय पर खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी की गई है ताकि फरवरी के बाद खाद की कोई कमी न हो।”

लेकिन खाद की बढ़ती कीमत के कारण सब्सिडी का खर्च बहुत ज्यादा हो गया है।

कृषि, वानिकी एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्र

उन्होंने कहा, ”मौजूदा कीमत के हिसाब से ऐसी स्थिति है कि केवल डीएपी में 120 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दी जानी चाहिए।”

चूँकि भविष्य की आवश्यकताओं के लिए इस पर लगभग 59 अरब रुपये की लागत आने का अनुमान है, इसलिए इसका प्रबंधन एक चुनौती बन गया है। इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय से चर्चा की जा रही है।

उनके अनुसार, हालांकि सरकार किसानों को उर्वरक सब्सिडी के रूप में बड़ी मात्रा में धनराशि प्रदान कर रही है, लेकिन इसका लाभ सभी किसानों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया है।

उन्होंने कहा, “इसलिए, आपूर्ति और वितरण प्रणाली को और व्यवस्थित करना आवश्यक है ताकि सब्सिडी का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके।”

भले ही सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए भारी धनराशि खर्च की है, लेकिन वास्तविक किसानों की शिकायत रही है कि वितरण प्रणाली में त्रुटियों के कारण उन्हें उर्वरक नहीं मिल रहा है।

यह दावा करते हुए कि सरकार बजट की कमी के बावजूद किसानों के कल्याण के लिए अधिकतम प्रयास कर रही है, मिश्रा ने कहा कि वितरण प्रणाली को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, विनिर्माण कंपनियों को प्रोत्साहित करने और नई आपूर्ति एवं वितरण प्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा चल रही है।

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