सरकारी पेड़ों की कटान-बिक्री, नीलामी से पहले लकड़ी गायब

 

रायबरेली। परशदेपुर क्षेत्र के नहर कोठी परिसर में सरकारी संपत्ति के खुलेआम दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां दो दिन पहले कटहल, चिलवल और आम सहित कुल चार सरकारी पेड़ों को बिना किसी विधिवत नीलामी प्रक्रिया के कटवाकर बेच दिया गया। इन पेड़ों की अनुमानित कीमत करीब 70 हजार रुपये बताई जा रही है।स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पेड़ों की कटान के तुरंत बाद अधिकांश लकड़ी ट्रैक्टर के माध्यम से परिसर से बाहर भेज दी गई। जब लोगों ने इस पर सवाल उठाए और मामला तूल पकड़ने लगा, तो विभागीय कर्मचारियों द्वारा आनन-फानन में कुछ लकड़ी के बोटे नहर कोठी परिसर में रखवा दिए गए, ताकि कागजों में नीलामी की औपचारिकता पूरी दिखाई जा सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर रखी गई लकड़ी वास्तविक मात्रा से काफी कम है और यह केवल दिखावे की कार्रवाई है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले ही अधिकांश लकड़ी गायब हो चुकी थी। इस पूरे घटनाक्रम से विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।बताया जा रहा है कि यह पहली बार नहीं है जब नहर कोठी में सरकारी पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री का आरोप लगा हो। इससे पहले भी परिसर में लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के बेचने की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन उस समय भी किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई के अभाव में कर्मचारियों के हौसले बुलंद होते गए और एक बार फिर सरकारी पेड़ों की कटान-बिक्री कर दी गई।विभागीय अधिकारियों की ओर से सफाई दी जा रही है कि बारिश के कारण पेड़ गिर गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पेड़ गिरे थे तो नियमानुसार उनकी नीलामी की जानी चाहिए थी। बिना नीलामी लकड़ी का बाहर जाना कई सवाल खड़े करता है।ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामलों में और बढ़ोतरी होगी और सरकारी संपत्ति का इसी तरह नुकसान होता रहेगा।

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